केंद्रीय पुस्तकालय में गल-फट रहीं पुस्तकें
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केंद्रीय पुस्तकालय के रिकॉर्ड में 1.74 लाख पुस्तकें हैं। इनमें कितनी सुरक्षित हैं और कितनी नष्ट हो गईं हैं, डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पास इसका कोई लेखाजोखा नहीं है। आश्चर्य की बात तो ये है कि 1927 से एक बार भी सत्यापन नहीं हुआ है। इसी साल विश्वविद्यालय की नींव रखी और पुस्तकालय भी स्थापित हुआ था।
पुस्तकालय में स्टाफ और फर्नीचर की कमी से पुस्तकों का रखरखाव नहीं हो पा रहा है। खुली रैक में पुस्तकें रखी हुईं हैं, अलमारी टूटी हैं। खिड़की भी टूटी हैं। इससे बंदर कमरों में पहुंचकर पुस्तकों को नुकसान पहुंचाते हैं। धूल से भी पुस्तकें खराब हो रहीं हैं। सैकड़ों पुस्तकें रद्दी में तब्दील चुकी हैं।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय पिछले 95 साल से पुस्तकों की खरीद का आंकड़ा कुल भंडार में जोड़ता रहा, लेकिन बेकदरी से नष्ट हुईं पुस्तकों का कोई हिसाब उसके पास नहीं है। पुस्तकालय अध्यक्ष प्रो. यूसी शर्मा ने बताया कि पुस्तकालय की बदहाली दूर करने के लिए प्रस्ताव बनाया गया है। कुलपति के संज्ञान में भी इसे लाया गया है। जल्द सुधार के लिए कार्य शुरू कराए जाएंगे।
पुस्तकालय की बदहाली पर छात्रों ने किया हंगामा
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय की बदहाली पर छात्रों ने कुलसचिव कार्यालय पर हंगामा किया। नारेबाजी करते हुए छात्र कुलसचिव कार्यालय पहुंचे। गेट न खोलने पर गार्ड से नोंकझोंक हुई। कुलसचिव के हस्तक्षेप करने पर छात्र भीतर गए और ज्ञापन सौंपा। छात्रों ने पुस्तकालय की मरम्मत कराने और पुस्तकों के रखरखाव की मांग की है। साथ ही ऐसा न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी है।
छात्र नेता सौरभ चौधरी ने कहा कि विश्वविद्यालय का पुस्तकालय एतिहासिक है। यहां मूल संविधान की कॉपी समेत कई दुर्लभ पुस्तकें हैं। छत का प्लास्टर और कंक्रीट गिर रही है, कभी भी कोई छात्र घायल हो सकता है। पुस्तकें भी भीग रही हैं। फर्नीचर भी नहीं हैं। इसकी हालत बदतर है। इसका सुधार करवाया जाए। राज्यपाल महोदय ने भी पुस्तकालय की मरम्मत के आदेश दिए थे, फिर भी कोई सुनवाई नहीं हुई। इसकी शिकायत राजभवन भेजेंगे। प्रदर्शन में अंकित यादव, अमित यादव, नितिन चौहान, सतेंद्र सिंह, संदीप यादव, संतोष यादव, अमन चौधरी, ललित यादव, अमन सिंह, माधव चौधरी, राहुल चौधरी, प्रशांत सिंह, अमन वर्मा, माधव त्यागी आदि मौजूद रहे।