सरहद पर पाकिस्तान की गोलाबारी में शहीद हुए एटा जिले के राजेश कुमार उर्फ बॉबी शनिवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। शहीद के चचेरे भाई ने चिता को मुखाग्नि दी। अंतिम यात्रा में हजारों की तादाद में लोग शामिल हुए। नम आंखों से शहीद को अंतिम विदाई दी।
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जलेसर से करीब नौ किमी की पदयात्रा कर शहीद का पार्थिव शरीर अंत्येष्टि स्थल पर लाया गया। इस दौरान भारत माता की जय...जब तक सूरज चांद रहेगा, अमर शहीद बॉबी तेरा नाम रहेगा...के नारे गूंजते रहे। यहां सेना और प्रशानिक अफसरों ने शहीद को श्रद्धांजलि दी।
अंतिम यात्रा में डीएम आईपी पांडेय, एएसपी ओपी सिंह, विधायक जलेसर संजीव दिवाकर, भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ दिनेश वशिष्ठ, जलेसर चेयरमैन विकास मित्तल, सपा के पूर्व विधायक रणजीत सुमन, अवागढ़ ब्लॉक प्रमुख लालकान्त समेत हजारों लोग शामिल हुए।
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10 हजार से ज्यादा लोग शामिल
गांव रेजुआ पहुंचा शहीद का पार्थिव शरीर
- फोटो : अमर उजाला
शनिवार को सुबह सेना के वाहन से शहीद का पार्थिव शरीर एटा जिले के जलेसर पहुंचा। यहां से शव को दूसरे वाहन में रखा गया और पदयात्रा शुरू हुई। करीब नौ किमी तक पदयात्रा में शहीद के अंतिम दर्शन को 10 हजार से ज्यादा लोग उमड़े।
शहीद की अंतिम यात्रा पूरे गाजेबाजे के साथ निकाली गई। नौ किमी चलने के बाद पदयात्रा गांव रेजुआ पहुंच गई, जहां से तिरंगे में लिपटे लाल का शव उनके घर पर लाया गया। शव देखते ही पत्नी, मां और बहनें फफक पड़ीं। यह देख हर आंख नम हो गई।
राजेश की पत्नी रीना छह माह की गर्भवती है। वो रोते रोते बेसुध हो गई। किसी तरह परिजनों ने उसे संभाला। पिता नेमसिंह को इकलौता बेटा खोने का गम है तो शहादत पर गर्व भी। उनकी आंखों से भी आंसू थम नहीं रहे हैं।
शहीद को दी सलामी
पंचतत्व में विलीन हुए शहीद राजेश कुमार
- फोटो : अमर उजाला
यहां से पार्थिव शरीर अंत्येष्टि स्थल ले जाया गया। जहां सेना के जवानों ने फायरिंग कर शहीद को गार्ड आफ ऑनर की सलामी भी दी। सेना और पुलिस अधिकारियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर शहीद को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद चचेरे भाई ने चिता मुखाग्नि दी।
इससे पहले अंतिम समय तक शहीद के अंत्येष्टि स्थल और स्मारक को लेकर पशोपेश की स्थिति रही। प्रशासन ने जो जगह चिंहित की उस पर परिजनों ने एतराज जताते हुए इंकार कर दिया। इसके बाद अफसर दूसरी जगह तलाशते रहे।
राजेश कुमार उर्फ बॉबी पुत्र पुत्र नेमसिंह वर्ष 2013 में सेना में भर्ती हुए थे। वो जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में 57 राष्ट्रीय राइफल्स रेजीमेंट में तैनात थे। 6 दिसंबर की शाम पाकिस्तान की ओर से हुई गोलाबारी में बॉबी शहीद हो गए।
इसकी सूचना मिलते ही ही परिवार में कोहराम मच गया। हर कोई राजेश के शहीद होने की खबर सुनकर सन्न रह गया। ग्रामीण राजेश के घर पहुंचे और पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया। पत्नी, बूढ़ी मां और बहनों को रो रोकर बुरा हाल है।
लोगों की आंखों में आंसू हैं, चेहरे पर फक्र। एक ओर माटी के लाल से जुदा होने का गम तो दूसरी ओर देश रक्षा के लिए बलिदान होने पर गर्व। बचपन से लेकर जवानी तक बिताए हर लम्हे की तस्वीर लोगों की आंखों के सामने तैर रही हैं।