इस दौरान परिवार में कोहराम मचा रहा। मां रजनी, बहन नेहा, बंदना, शिल्पी और पत्नी अंजू का शव के पास रो-रोकर बुरा हाल था। मासूम पांच वर्षीय पुत्र गगन और तीन वर्षीय पुत्री अनन्या को सिर से पिता का साया उठने का आभास भी नहीं था। वह अन्य रोते बिलखते परिजनों की गोद में पिता के शव और भीड़ को देखते रहे।
पार्थिव शरीर के साथ आए
वीर सपूत का पार्थिव शरीर गांव पहुंचने की सूचना पर दोपहर चार बजे ही एसडीएम संदीप यादव और नायब तहसीलदार अभिषेक कुमार और एसीपी इमरान अहमद उनके घर पहुंचे। वह परिजन के पास बैठकर सांत्वना देते रहे।
परिवारीजन ने मौत का कारण जानने के लिए साथ आए आईटीबीपी के अधिकारियों से पोस्टमार्टम रिपोर्ट की मांग की। आईटीबीपी अधिकारियों ने उनको कुछ कागज दिखाएं। इसमें दर्शाया गया है कि मानवेंद्र 16 ,17 तारीख को ट्रेन में सफर कर रहे थे। इस दौरान खाने से उनको फूड प्वाइजनिंग हुई है। इसके बाद उनका उपचार कराया गया।
हालत बिगड़ने पर इनको दूसरे अस्पताल में 5 बजे शाम आईसीयू में एडमिट कराया गया। वहां 7 बजे लगभग उनका निधन हो गया। एसीपी इमरान अहमद और आईटीबीपी अधिकारी परिजनों को समझने के प्रयास कर रहे हैं। अभी तक शव अंतिम संस्कार के लिए नहीं ले जाने दिया गया है।