हौसले के पंख लगाए मंजिल की ओर बढ़ रही नेत्रहीन छात्रा प्रेमलता युवाओं के प्रेरणा है। उसने साबित कर दिया है कि तंगहाली या शारीरिक अक्षमता भी आपको मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकते। बीएड की नेत्रहीन छात्रा की मांग पर जिलाधिकारी आरपी सिंह ने उन्हें लैपटॉप भेंट किया और युवाओं को इनसे प्रेरणा लेने को कहा। छात्रा ने बताया कि वह अब लॉ की पढ़ाई कर वह सुदृढ़ न्याय व्यवस्था और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्य करेगी।
कासगंज के बढ़ारीकला निवासी मुंशीलाल की पुत्री प्रेमलता (22) छह भाई बहनों में सबसे बड़ी है। नेत्रहीन होने के कारण उसके जन्म के समय उसकी मां नारायन देवी और पिता दोनों की दुखी हुए थे, लेकिन आज वह अपनी बेटी को अपना गौरव मानते हैं। मुंशीलाल के पास मात्र दो बीघा खेत है। इसमें परिवार का गुजारा नहीं हो सकता, इसलिए वह मेहनत-मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं।
प्रेमलता बड़ी हुई तो माता-पिता ने उसको शिक्षित बनाने का सपना देखा। उन्होंने प्रेमलता को राष्ट्रीय गिरजानंद कन्या विद्यालय विकासपुरी नई दिल्ली में शिक्षा दिलाई। यहां नेत्रहीन बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था है। प्रेमलता ने सीबीएसई से 10वीं की परीक्षा 90 प्रतिशत अंकों के साथ और 12वीं की परीक्षा में 80 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। प्रथम श्रेणी से बीए पास करने के बाद अब वह चित्रकूट करवी के कॉलेज से बीएड कर रही हैं। जिले के तत्कालीन जिलाधिकारी के विजयेंद्र पांडियान ने प्रेमलता का यहां बीएड कॉलेज में प्रवेश सुनिश्चित कराया था।
अमर उजाला से बातचीत में प्रेमलता ने बताया कि वह बीएड के बाद एलएलबी और एलएलएम की शिक्षा लेगी, ताकि वह न्याय के लिए काम कर सके। उसने कहा कि वह चाहती है कि लोगों को न्याय मिले और भ्रष्टाचार का खात्मा हो। लैपटॉप कैसे संचालित करेंगी, इसके बारे में प्रेमलता ने बताया कि वह लैपटॉप में टॉक सॉफ्टवेयर पड़वाएंगी, इसके बाद बोलकर लैपटॉप से विभिन्न विषयों से संबंधित जानकारी को सुनकर शिक्षा लेगी।
उन्होंने लैपटॉप देने के लिए जिलाधिकारी का आभार भी जताया। पिता मुंशीलाल का कहना है कि बेटी उनका गौरव है। वह और उनका परिवार पूरी तरह से उसके सहयोग में जुटे हुए हैं। मेहनत मजदूरी करके जो भी आमदनी होती है उससे ही परिवार का पालन पोषण और जरूरत पूरी की जाती है।
कासगंज के जिलाधिकारी आरपी सिंह ने बताया कि मेधावी प्रेमलता नेत्रहीन है, लेकिन उसका हौसला सामान्य से अधिक है। ऐसे हौसले वाले मेधावियों को प्रोत्साहित करना चाहिए है, जिससे समाज में अच्छा उदाहरण सामने आए।