एत्मादपुर के धौर्रा में पटाखा भरते लोग
- फोटो : अमर उजाला
एटा में शनिवार सुबह पटाखा फैक्ट्री में धमाके से छह लोगों की मौत हो जाने के बाद यह सवाल फिर खड़ा हुआ है कि धौर्रा और नगला खरका में पटाखों के अवैध कारखाने बंद क्यों नहीं कराए जा रहे हैं? लाइसेंस लेकर किए जा रहे पटाखा निर्माण में भी इस बार अभी तक अग्निश्मन विभाग से लेकर प्रशासन के अधिकारी तक जांच के लिए नहीं गए हैं। यहां के पटाखों से 15 सालों में 25 की मौत हो चुकी है।
एत्मादपुर के धौर्रा में पटाखा भरते लोग
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धौर्रा और नगला खरगा में खुले में पटाखे बनाए जाते हैं। इसके लिए इन्हें प्रशासन की ओर से कोई प्रशिक्षण भी नहीं दिया जा रहा। ये लोग पटाखों में बारुद अंदाजे से भरते हैं। पटाखा बनाने का काम परंपरागत होता है। इसमें बच्चे भी लगा दिए गए हैं। प्रशासन इस पर ध्यान नहीं दे रहा। बोरे में भरकर पटाखे कहीं भी रख दिए जाते हैं। इन्हें बोरों में ही दूसरी जगह भेजा जाता है। इसी दौरान हादसे हुए हैं। पटाखा बनाने वालों को नहीं मालूम कि कौन कौन से रसायन इस्तेमाल करते हैं? लायक सिंह, विजयपाल बताते हैं कि हम तो रंग देखकर पहचान करते हैं कि कौन सा मसाला है।
पटाखा फैक्टरी में विस्फोट (फाइल फोटो)
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हर कोई अपने-अपने कामों में व्यस्त था, तभी अचानक जोरदार धमाका हुआ। जिससे आसमान गूंज उठा, जमीन हिल गई और लोग कांप गए। धमाकों की आवाजें सुनकर हर कोई घटनास्थल की ओर दौड़ पड़ा। जब तक लोग पहुंचते तब तक तीन मंजिला मकान मलबे में तब्दील हो गया। शनिवार को एटा के कस्बा मिरहची के मोहल्ला गड्ढा स्थित पटाखा फैक्टरी में हुए विस्फोट के बाद ऐसा ही खौफनाक मंजर था।
पटाखा फैक्टरी में विस्फोट (फाइल फोटो)
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एत्मादपुर में पटाखे बनाए जाने के कारखानों की जांच के लिए पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम बनाई जाएगी। बगैर लाइसेंस जो पटाखे बनाते मिलेगा,उस पर सीधे एफआईआर होगी। लाइसेंसधारकों के यहां भी सभी मानकों पर पड़ताल की जाएगी। साथ ही 15 दिन में सभी पटाखा गोदामों की भी जांच होगी - रवि कुमार, एसपी वेस्ट
घटनास्थल पर पुलिस व अन्य लोग (फाइल फोटो)
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पटाखा गोदामों और कारखानों में जल्द ही सघन चेकिंग की जाएगी। इनमें अग्निश्मन के यंत्रों की पड़ताल होगी। धौर्रा और नगला खरगा में टीम भेजी जाएगी - अक्षय रंजन शर्मा, सीएफओ।