मधुमेह रोगियों में कनिंघमेला फंगस का भी खतरा
कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके मधुमेह रोगी और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों में संक्रमण से ठीक होने के बाद कनिंघमेला फंगस का भी खतरा बढ़ गया है। एसएन मेडिकल कॉलेज में एक मरीज में इसकी पुष्टि हुई है। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत ठीक है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. आरती अग्रवाल ने बताया कि यह म्यूकरमाइकोसिस के परिवार का ही एक फंगस है। यह आंखों के अलावा दिमाग को तेजी से संक्रमित करता है। आंद्रता वाले क्षेत्रों में यह फंगस पाया जाता है। वैसे घबराने की जरूरत नहीं है, इसका इलाज भी अन्य फंगस की तरह ही है।
कनिंघमेला फंगस के मरीज की हालत ठीक
ब्लैक फंगस वार्ड के प्रभारी डॉ. अखिल प्रताप सिंह ने बताया कि मरीज का ऑपरेशन सप्ताह भर पहले किया था। फंगस के टुकड़े को बायोप्सी में कनिंघमेला फंगस की पुष्टि हुई है। यह बहुत ही कम मरीजों में मिलता है। एसएन में यह पहला मामला है। इसका इलाज अन्य फंगस की तरह ही है। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत में सुधार हो रहा है।
क्या है कनिंघमेला
माइक्रो बायलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. आरती अग्रवाल ने बताया कि यह म्यूकरमाइकोसिस के परिवार का ही एक फंगस है। इसके परिवार में राइपोजस प्रजाति से संबंधित मोल्ड, म्यूकोर प्रजातियां, बर्थोलेटिया, लिक्टीमिया और एपोफिसोमी प्रजातियां भी शामिल हैं। यह ज्यादातर मिट्टी में मिलते हैं। आंद्रता वाले क्षेत्रों में मिलता है।
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