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ताजनगरी में पहले से तेज रही मोदी की दूसरी आंधी 

Sun, 12 Mar 2017 01:16 AM IST
ताजनगरी में पहले से तेज रही मोदी की दूसरी आंधी 
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ताजनगरी में पहले से तेज रही मोदी की दूसरी आंधी  - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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ताजनगरी ने तीन साल में दूसरी बार मोदी की आंधी देखी है। इस बार तो हवा पहले से भी तेज चली है। 2014 में भी जनपद की सभी नौ विधान सभा सीटों पर भाजपा को बढ़त मिली थी। लेकिन तब जिले में कुल वोट 931077 मिले थे। इस बार तो आंकड़ा दस लाख के भी पार चला गया है। 2012 से तुलना करें तो विधायकों की संख्या दो से 4.5 गुना बढ़कर नौ हो गई है। सबसे खास बात यह है कि मतगणना के बाद भाजपा नेताओं ने भी इस नतीजे का अनुमान नहीं लगाया था। भाजपाई जिले में पांच से छह सीटों पर जीत पक्की मानकर चल रही थी। ज्यादा से ज्यादा सात सीट जीतने की संभावना जता रहे थे। 
इस जीत के तीन बड़े कारण माने जा रहे हैं। पहला कास्ट केमिस्ट्री। भाजपा ने ठाकुर और ब्राहमणों के बड़े चेहरों को अपनी ओर किया। राजा अरिदमन सिंह साइकिल से उतर भाजपा में आए। अशोक दीक्षित की बेटी रुपाली दीक्षित ने भाजपा ज्वाइन की। ठाकुर और ब्राहमणों का यह समीकरण बड़े काम का है। यह ठाकुर और ब्राहमण बहुल बेल्ट है। दूसरा काम किया ओबीसी में सेंधमारी का। वैश्य समाज को दो टिकट दिए। निषाद और कुशवाहा को भी जोड़ लिया। 
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यही काम पहले बसपा करती थी। इस बार रणनीति फेल हो गई। दो ब्राहमण तो उतारे लेकिन जोर शोर से नहीं। सतीश मिश्रा चुनाव में चेहरा दिखाने तक नहीं आए। इसका भी मैसेज गलत गया। ब्राहमण वोटर भाजपा में चले गए। कुछ असर रहा सांप्रदायिक तनाव की घटनाओं का। पुलिस इन्हें हलके में ले रहे थे लेकिन अंदर ही अंदर वोटोरों का ध्रुवीकरण होता जा रहा है। यह भी आखिर में भाजपा के हित में रहा। एक फैक्टर बसपा विधायकों से नाराजगी का था। दो दो बार जीत चुके थे। जब 2007 में जीते, तब सरकार थी, लोगों के काम करा पा रहे थे। 2012 में विपक्ष मेें आ गई, पुलिस प्रशासन में पहले जैसी पकड़ नहीं रही। लोग विकल्प ढूंढने लगे, भाजपा ने खुद को मजबूती के पेश किया और बन गई बात। भाजपा के संगठन ने भी बेहतर काम किया। शहर में विजय शिवहरे और जिले में श्याम भदौरिया ने वोटरों को घर से निकलवाकर बूथ पर पहुंचाने की जो रणनीति बनाई , वो काम आई। वोट प्रतिशत बढ़ा। तभी लग गया था कि इस बार भाजपा की बल्ले बल्ले होने जा रही है। 
नोटबंदी के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोठी मीना बाजार में रैली की। इससे पहले यहीं पर बसपा अध्यक्ष मायावती ने रैली की थी। दोनों की रैली की तुलना की गई। भाजपा का माहौल बन गया। इसी को भाजपा नेताओं ने कैश किया। नोटबंदी को गरीबों के हित में लिए गए फैसले के रूप में प्रचारित किया। 

सांसदों की बची प्रतिष्ठा 
प्रदेश की नौ सीटों पर मिली इस सफलता से सांसदों की सीना फूल गया है।  2014 के लोकसभा चुनाव में आगरा सीट पर सांसद रामशंकर कठेरिया को रिकार्ड 583716 वोट मिले थे। कठेरिया को एत्मादपुर विधानसभा क्षेत्र में 128231, कैंट में 116642, दक्षिण 113562, उत्तर में 145878, जलेसर विधानसभा में 78828 वोट मिले थे। फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट पर चौधरी बाबूलाल को आगरा ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में 113459 वोट, फतेहपुर सीकरी में 108299, खेरागढ़ में 72426, फतेहाबाद में 84059, बाह में 47946 वोट मिले थे। विधानसभा चुनाव में हर सीट पर भाजपा का प्रत्याशियों को वोट  बढ़कर मिले हैं। 
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मेयर और पार्षद की टिकट के लिए होगी मारामारी
विधानसभा चुनाव के बाद अब नगर निकायों के चुनाव की बारी है। जुलाई में नगर निगम के वर्तमान बोर्ड का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। चूंकि इस बार प्रदेश में भाजपा की सरकार होगी। आगरा जिले की सभी सीटों पर भाजपा के विधायक, दो सांसद होंगे। नगर निगम में भी यदि सत्ताधारी दल का बोर्ड का बनता है तो उसकी ताकत अधिक होगी। इसलिए इस बार नगर निगम के चुनावों में भाजपा की टिकट पर पार्षद और मेयर का चुनाव लड़ने वालों की लंबी फेहरिस्त होगी, टिकट बंटवारा पार्टी के लिए टेढ़ी खीर होगा।
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