उत्तर प्रदेश के आगरा में निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है। अपने-अपने दावे और वादे के साथ प्रत्याशी मैदान में हैं। मुद्दे तो वही पुराने हैं मगर नई पैकिंग में पुराने माल की तर्ज पर प्रत्याशी पूरे जोश के साथ जनता के बीच पहुंच रहे हैं। निर्दलीय बने तमाम बागी पार्टी प्रत्याशियों के लिए मुश्किल खड़ी करेंगे। लिहाजा भाजपा निर्दलीयों और बागियों को अपने पक्ष में करने का जोर लगा रही है।
निकाय चुनाव 2017 में भाजपा और बसपा को छोड़ दें तो राष्ट्रीय दलों का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक था। तमाम क्षेत्रीय दल तो अपना खाता तक नहीं खोल पाए थे। अब निकाय चुनावों का माहौल धीरे-धीरे परवान चढ़ने लगा है। जनसंपर्क के साथ बैठकों का दौर शुरू है। बागियों को मान-मनौव्वल कर बैठाने के लिए संगठन हर जुगत लगा रहा है।
कमला नगर, जयपुर हाउस, बल्केश्वर क्षेत्र में भाजपा ने निर्दलीय प्रत्याशियों को बैठाने में सफलता भी पाई है। मगर यह चुनाव नहीं आसान... बात अगर निकाय चुनाव 2017 की करें तो इसमें भारतीय जनता पार्टी के 52 और बहुजन समाज पार्टी से 28 प्रत्याशी सदन में पहुंचे थे। जबकि, समाजवादी पार्टी के 5 और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मात्र दो उम्मीदवार ही सदन में पहुंचे।
उस समय सदन में 13 प्रत्याशियों ने निर्दलीय के रूप में जीत दर्ज की थी। इस बार भी चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी पार्टियों की राह में सबसे बड़ा रोड़ा हैं। पार्टियों का मानना है कि भले ही ये जीत न पाएं मगर पार्टी प्रत्याशियों की राह में कांटे जरूर बो देंगे। लिहाजा यहां रूठों को मनाने का दौर चल रहा है।
शुक्रवार को बल्केश्वर मंडल के निर्दलीय प्रत्याशी विमल गुप्ता और नंदी महाजन ने भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में बैठने की घोषणा कर दी। जयपुर हाउस से निर्दलीय क्षमा जैन सक्सेना को भी पार्टी में शामिल कर चुनाव से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।
कमला नगर एबीसी ब्लॉक को पहले ही निर्विरोध करा लिया गया है। बावजूद इसके पार्टी भीतरघात से आशंकित है। गुप्त बैठकों के जरिए समीकरण साधने की कोशिश है। मगर इनका कितना असर होगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
यह था आगरा का हाल
- निकाय चुनाव 2017
- भाजपा- 52
- बसपा- 28
- सपा- पांच
- कांग्रेस- दो
- निर्दलीय- 13
नगर निगम चुनाव 2017 में भाजपा ने प्रदेश के कुल 596 वार्डों पर जीत दर्ज कराई थी। सपा 202 के साथ दूसरे और बसपा 147 के साथ तीसरे नंबर पर रही थी। 110 वार्डों के साथ कांग्रेस चौथे नंबर रही थी। प्रदेश में 202 निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत अपने नाम दर्ज कराई। जबकि राष्ट्रीय लोकदल ने चार, आम आदमी पार्टी ने तीन सीट और शिवसेना महज एक सीट ही हासिल कर पाई। लगभग एक दर्जन क्षेत्रीय और अमान्यता प्राप्त दल तो अपना खाता भी नहीं खोल पाए थे।