भाजपा का झंडा (सांकेतिक तस्वीर)
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भाजपा की राज्यसभा प्रत्याशियों की सूची में रामप्रताप समेत ब्रज के तीन मजबूत नेताओं को जगह देने से क्षेत्र में सांसदों की संख्या 8 से बढ़कर 11 हो जाएगी। हालांकि इस संख्या से ज्यादा पार्टी ने जातीय संतुलन और समीकरण को बेहतर कर अपने वोटबैंक पर अपनी पकड़ बेहतर करने का प्रयास किया है। मौजूदा समय में लोधी, कुर्मी और क्षत्रिय वोटरों का भाजपा के प्रति झुकाव है। ऐसे में पार्टी जो साथ हैं, उन्हें और मजबूती के साथ जोड़ने की कोशिश में जुटी दिख रही है।
भाजपा की राज्यसभा प्रत्याशियों की सूची से संकेत मिले हैं कि नए जातीय समर्थन की कोशिशों के बीच पार्टी इस बात पर खास जोर देना चाह रही है कि जो साथ हैं, वह मजबूती से जुड़े रहें। अरुण सिंह, राजनाथ सिंह जैसे बड़े क्षत्रिय चेहरों के दिल्ली पहुंचने के बाद यूपी में जब योगी आदित्यनाथ सीएम बने तो पूर्वांचल में क्षत्रिय लामबंद होने लगे। हालांकि यूजीसी को लेकर हाल में सबसे उग्र प्रदर्शन एत्मात्पुर की उसी बाइसी से हुआ, जहां की सियासत में रामप्रताप प्रभावशाली हैं।
ऐसे में रामप्रताप जैसे भरोसेमंद चेहरे के जरिये आगरा समेत ब्रज में अपने क्षत्रिय वोटरों का साथ बरकरार रखने की कोशिश कर रही है। श्रुति गंगवार बरेली के दिग्गज भाजपा नेता रहे झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी हैं। उनके सांसद बनने से भाजपा के साथ रहने वाला कुर्मी वोटबैंक में भरोसा बढ़ेगा। वहीं, लोध वोटरों को बरकरार रखने का सिलसिला भी जारी है।
हाल ही में लोध वोटबैंक को सहेजने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बेटे पूर्व सांसद राजवीर सिंह राजू भैया के करीबी पूरन लाल लोधी को ब्रज क्षेत्र अध्यक्ष बनाने के बाद उनके दूसरे करीबी बरेली की आवला सीट से विधायक डाॅ. धर्मपाल सिंह के राज्यसभा भेजा जाना इसी का संदेश दे रहा है। हालांकि इसका 2027 के विधानसभा चुनाव में कितना और क्या लाभ होगा, यह देखना होगा।