उन्नाव के सांसद डॉ सच्चिदानंद हरि साक्षी भी ढांचा विध्वंस के चश्मदीद हैं। शुरू से ही संत एवं महामंडलेश्वर के रूप में जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े रहे साक्षी महाराज का कहना है कि घटना के कई दिन पूर्व से ही रामभक्त कारसेवकों का अयोध्या पहुंचना शुरू हो गया था।
लेकिन छह दिसंबर को राम भक्तों का आक्रोश चरम पर आ गया। जय श्रीराम के नारे लगा रहे कारसेवक किसी भी नेता को सुनने को तैयार नहीं थे। नेताओं के शांति के आह्वान से उनका आक्रोश एवं उत्साह और बढ़ रहा था। ढांचे का विध्वंस इसी आक्रोश का परिणाम है।
वर्ष 1992 में मथुरा से सांसद रहे साक्षी महाराज का कहना है कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन ही मुझे राजनीति में लाया। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूमि पूजन कर पांच सौ वर्ष के कलंक को धोएंगे। यह दिन हर देशवासी के लिए सौभाग्य का दिन है। इसके दिए देश के हिंदू-मुस्लिम सभी बधाई के पात्र हैं।