सूत्रों की मानें तो इन विधायकों ने प्रधानमंत्री द्वारा बुधवार को कोठी मीना बाजार मैदान पर विभिन्न योजनाओं के लोकार्पण व शिलान्यास वाली पट्टिकाओं पर अपना नाम न होने को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है।
इनका कहना था कि लगभग सभी योजनाएं प्रदेश सरकार द्वारा पूरी कराई गई हैं। इसके बावजूद इनमें से किसी भी शिलापट्टिका क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि का नाम नहीं है। उनके नाम गायब कर दिए गए हैं, जबकि यह योजनाएं उन्हीं की पहल से या तो पूरी हुई हैं या फिर उनका शिलान्यास संभव हुआ है।
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले को लेकर डीएम ने हाथ खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि यह उनके स्तर का मामला नहीं है। न ही उन्होंने किसी जनप्रतिनिधि का नाम शिलापट्टिका से हटवाया है।
इसके बाद विधायकों का प्रतिनिधि मुख्यमंत्री से मिलने की तैयारी में है। ताकि उन्हें इस पूरे मामले से अवगत कराया जा सके। मामला पीएम मोदी से जुड़ा होने के कारण एक भी विधायक खुलकर कुछ बोलने को तैयार नहीं है। डीएम से मिलने के बाद उनका कहना था कि वह चाय पर आए थे।
शिलापट्टिकाओं पर सिर्फ इनका है नाम
शिलापट्टिकाओं पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राज्यपाल राम नाईक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा और सांसद डा. रामशंकर कठेरिया के नाम लिखे हैं।
योगेंद्र को एक और झटका
विधायक योगेंद्र उपाध्याय को एक और झटका लगा है। गंगाजल योजना को अंजाम तक पहुंचाने में दिन-रात एक कर देने वाले विधायक योगेंद्र उपाध्याय का शिलापट्टिका तक पर नाम नहीं है। जबकि वह पिछले कई सालों से इसको लेकर पैरोकारी कर रहे थे।
इस योजना के लोकार्पण के दौरान भी न तो उनका जिक्र किया गया और न ही इसका श्रेय उन्हें दिया गया। प्रधानमंत्री भी इस योजना के पूरा होने पर सांसद डा. रामशंकर कठेरिया को ही बधाई दी थी। अब शिलापट्टिका पर भी उन्हीं का ही नाम है।
पीएमओ के हस्तक्षेप के बाद बदले गए नाम
विभिन्न योजनाओं से संबंधित शिलापट्टिकाओं को लोक निर्माण विभाग ने तैयार करवाया था। बताया जा रहा है कि पूर्व में जो शिलापट्टिकाएं तैयार कराई गई थीं, उन पर विधायकों के नाम थे।
मगर, इनका प्रारूप जब शासन और पीएमओ भेजा गया तो उसमें संशोधन हो गया। सूत्रों की मानें तो पीएमओ के हस्तक्षेप के बाद ही इन पट्टिकाओं पर सिर्फ पांच नाम ही रह गए थे।