दक्षिण क्षेत्र से भाजपा के विधायक योगेंद्र उपाध्याय ने 1993, 2011 और 2013 के पांच मामलों में शनिवार को स्पेशल जज (एमपी-एमएलए) उमाकांत जिंदल की कोर्ट में सरेंडर किया। तारीख पर गैर हाजिर रहने के कारण उनके गैर जमानती वारंट जारी हुए थे।
कोर्ट ने 20 हजार के निजी मुचलके दाखिल करने तक विधायक को ढाई घंटे बैठाए रखा। इसके बाद मुकदमों की हर तारीख पर व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने की शर्त पर ही वारंट वापस लेकर छोड़ा।
विधायक योगेंद्र उपाध्याय ने शनिवार दोपहर 12:30 बजे कोर्ट में सरेंडर किया। स्पेशल जज ने विधायक को कोर्ट में बैठा दिया। तीन बजे 20 हजार के निजी मुचलके अधिवक्ता सुनील शर्मा, तपन वर्मा और रमेश सिंह लोधी ने पेश किए।
विधायक ने कोर्ट के समक्ष लिखित रूप से दिया कि हर तारीख पर व्यक्तिगत रूप से हाजिर होंगे। एडीजीसी ताराचंद यादव ने बताया कि स्पष्टीकरण देने और सशर्त वारंट वापस किए गए हैं। इसके बाद ही विधायक को छोड़ा गया।
भाजपा महामंत्री का भी सरेंडर
विधायक के साथ ही भाजपा के जिला महामंत्री प्रशांत पौनिया ने भी कोर्ट में समर्पण किया। इनके भी गैर जमानती वारंट जारी हुए थे। इन पर बसपा नेता राजेश अग्रवाल ने थाना लोहामंडी में 15 मई 2011 को मुकदमा दर्ज कराया था।
इसमें आरोप था कि भाजपा नेता गोदाम पर आए, उन्होंने पोस्टर फाड़ दिए। मारपीट और तोड़फोड़ की। कोर्ट ने इन्हें भी मुकदमे की हर तारीख पर व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने की शर्त पर ही वारंट वापस लेकर छोड़ा।
विधायक पर इन मामलों में चल रहे हैं मुकदमे
1. एक जनवरी 1993 को कांग्रेसियों ने भाजपा सांसद के ट्रेन से दिल्ली लौटते समय कैंट स्टेशन पर विरोध कर नारेबाजी की थी। दो जनवरी 1993 को तत्कालीन केंद्रीय रेल मंत्री माधव राव सिंधिया के दिल्ली से शताब्दी में आने की खबर पर भाजपाइयों ने कैंट स्टेशन पर नारेबाजी की थी। ट्रेन में तोड़फोड़ भी की गई थी। इस मामले में जीआरपी आगरा कैंट में मुकदमा दर्ज किया गया था।
2. बसपा नेता राजेश अग्रवाल ने थाना लोहामंडी में 15 मई 2011 को मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें आरोप था कि भाजपा नेता गोदाम पर आए, उन्होंने पोस्टर फाड़ दिए। मारपीट और तोड़फोड़ की।
3. 17 मार्च 2013 को सुबह छह बजे राजा की मंडी स्टेशन पर ट्रेन रोकी गई थी। इस मामले में तीन मुकदमे दर्ज हुए थे।