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बाबा साहब भी चाहते थे नोटबंदी हो: गौतम

Thu, 12 Jan 2017 12:34 AM IST
बाबा साहब भी चाहते थे नोटबंदी हो: गौतम
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भारतीय जनता पार्टी ने अनुसूचित समाज को जोड़ने के लिए स्वाभिमान मंडलीय सम्मेलन का आयोजन पीएस गार्डन रोहता ग्वालियर रोड पर किया। इसमें आगरा मंडल के अनुसूचित समाज के कार्यकर्ता और लोगों ने भाग लिया।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुसूचित मोर्चा भाजपा दुष्यंत गौतम ने कहा कि दलितों के मसीहा बाबा साहब डा. भीमराव अंबेडकर का नाम लेकर कुछ पार्टियां दलित समाज को भ्रमित कर रही हैं। उन्होंने पूर्व सरकारों पर आरोप लगाते हुए कहा कि जिस प्रकार से इंदिरा गांधी, नेहरू आदि लोगों के लिए संग्रहालय खोल कर उनसे जुड़ी वस्तुओं को संभाल कर रखा गया है तो क्या संविधान के रचियता डा. अंबेडकर से जुड़ी वस्तुओं को नहीं संभाला जा सकता था। उनके नाम पर राजनीति करने वाले गड्डियों के बिस्तर पर सो रहे हैं। पहली बार देश में मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने उनकी नीतियों को आगे बढ़ाते हुए गरीबों को अनेक योजनाएं दी हैं। नोटबंदी के विषय में अंबेडकर ने कहा था कि दस साल बाद यदि भारत में नोटबंदी नहीं की गई तो आर्थिक विकास में बाधा आयेगी किंतु 70 साल तक किसी भी नेता ने ये विषम फैसला नहीं लिया। इससे पहले कार्यक्रम को पूर्व सांसद एसपी सिंह बघेल और शिवशंकर शर्मा ने भी संबोधित किया। अध्यक्षता पूर्व मेयर बेबीरानी मौर्य ने की। मंच पर महानगर अध्यक्ष विजय शिवहरे, प्रभूदयाल कठेरिया, डा. जीएस धर्मेश, डा. रामबाबू हरित, अनिल चौधरी आदि रहे। कार्यक्रम में असफाक सैफी, बबलू लोधी, निहाल सिंह धाकड़, संजीव चौबे, सुभाष भिलावाली, गोविंद चाहर, राजकुमार पथिक, दिनेश अगरिया और बाबी वर्मा आदि रहे।

शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बना सम्मेलन
भाजपा का स्वाभिमान सम्मेलन शक्ति प्रदर्शन का अखाड़ा गया। पूर्व सांसद प्रभूदयाल कठेरिया ने भीड़ से हाथ उठवाकर कहा कि यहां बैठे लोग मेरे समर्थन में आए हैं, मैं उनका शुक्रिया अदा करता हूं। यह बात मंच पर बैठे दलित समाज के अन्य नेताओं को बुरी लगी। अशोक पिप्पल तो विरोध स्वरूप मंच पर खड़े हो गए और प्रभूदयाल कठेरिया को रोकने के लिए आगे बढ़े लेकिन वहां बैठे वरिष्ठ नेताओं के इशारे पर उन्होंने कदम वापस खींच लिए। 
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मंडलीय सम्मेलन बना मंडली सम्मेलन
स्वाभिमान मंडलीय सम्मेलन मंडली सम्मेलन बनकर रह गया। दरअसल आयोजकों ने जो बैक ड्राप बनाया था इस पर यह भी नहीं देखा कि मंडलीय सम्मेलन की जगह मंडली सम्मेलन लिखा हुआ है। ऐसे बैनर, पोस्टर कार्यक्रम स्थल पर कई जगह लगे थे। 
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