वह दौर गुजर गया, जब बेटियां बोझ कहीं जाती थीं। जब बेटियों को मौका मिला तो मैरीकॉम, गीता-बबीता, निखत जरीन बन आसमान छू लिया। बेटा-बेटी का भेद घटा तो कुनबे में बेटियां भी बढ़ने लगीं हैं। इसके गवाह बीते साल के आंकडे़ हैं। आगरा में प्रति हजार बालकों पर अब 885 बेटियां हैं। दस साल पहले यह औसत 861 था।
सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि 2011 की गणना में आगरा में एक हजार बालकों पर 861 बच्चियां थीं। जागरुकता, बेटियों को मिल रही सरकारी सुविधा और उनकी सफलता के चलते 10 साल में बेटियों की संख्या तेजी से बढ़ी। 2021 में बेटियों का औसत 885 हो गया है।
खासतौर से बीते पांच साल में जन्म दर डेढ़ गुना बढ़ी है। बीते साल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और निजी अस्पताल में 52010 बालक और 46032 कन्याएं जन्मीं। इनमें सरकारी अस्पतालों में 27779 बालक और 25590 बालिकाएं और नगर निगम से मिली पंजीकरण संख्या के मुताबिक निजी अस्पतालों में 24231 बालक और 20442 बालिकाएं जन्मी हैं।
ग्रामीण क्षेत्र में बेटियों की संख्या अधिक
स्वास्थ्य विभाग के जन्म और मृत्यु पंजीकरण सेल के नोडल प्रभारी डॉ. अंशुल पारीक ने बताया कि शहरी के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्र में बेटियों की संख्या अधिक रही। ग्रामीण क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्रों पर 2021 में 21434 बालक और 19910 बेटियां जन्मीं हैं, इनका औसत 1000/928 हुआ। शहरी क्षेत्र में नगर निगम में पंजीकरण कराने वालों में 30576 बालक और 26122 बालिकाएं हुईं। इनमें बेटियों का औसत 1000/854 रहा।
बेटियों की सफलता ने किया प्रेरित
- बेटियों की सफलता : शिक्षा में बेटियां बेटों से आगे हैं। व्यवसाय, खेलकूद, सेना, चिकित्सक और विज्ञान क्षेत्र में भी बेटियों ने नाम कमाया।
- शिक्षा और जागरूकता : शिक्षित होने से लोगों की सोच में बदलाव आया। सोशल मीडिया समेत अन्य मंचों से भी बेटियों के प्रति जागरूकता बढ़ी।
- सरकारी योजनाएं : बेटी के जन्म के बाद शिक्षा, नौकरी के लिए सुकन्या योजना और विवाह के लिए सामूहिक विवाह जैसी सुविधाएं।
- पीसीपीएनडीटी एक्ट : भ्रूण लिंग जांच रोकने के लिए इस कानून से गर्भ में बेटियों की पहचान करने वाले पकड़ में आए, कानून का डर भी बना।
(जैसा कि ऑब्स एंड गायनी सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. आरती गुप्ता ने बताया)
देहात में बेटियों का औसत
- फतेहपुर सीकरी : 992
- बिचपुरी : 971
- खंदौली-आंवलखेड़ा : 959
- जगनेर : 951
- जैतपुर : 950
ये है आगरा में हजार बालकों पर बालिकाओं का औसत
| साल |
कुल औसत |
शहरी |
ग्रामीण |
| 2021 |
885 |
854 |
928 |
| 2011 |
861 |
858 |
862 |
| 2001 |
866 |
859 |
870 |