आगरा में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया धीमी होने से आवेदकों को 8-8 महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। 100 वार्डों और हजारों आवेदनों के लिए केवल एक मजिस्ट्रेट होने से व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं, जबकि जिलाधिकारी ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया है।
आगरा में जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र का सिस्टम यू हीं नहीं फेल हुआ। नगर निगम के 100 वार्ड, आठ जोन में हजारों आवेदनों के लिए प्रशासन ने सिर्फ एक मजिस्ट्रेट तैनात किया है। जिसका खामियाजा आवेदकों को भुगतना पड़ रहा है। आठ-आठ महीने इंतजार के बाद भी कोई बेटा, तो कोई बेटी के जन्म और कोई पिता, कोई मां के मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भटक रहा है।
जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन के बाद फाइल सदर तहसील आती है। पहले निगम का सुपरवाइजर सत्यापन करता है। फिर एसडीएम की संस्तुति के बाद लेखपाल जांच करता है। इस प्रक्रिया में चार से छह महीने लग रहे हैं। जबकि पूर्व में 15 से 30 दिनों में प्रमाण पत्र जारी हो जाता था। आवेदकों को सदर तहसील स्थित एसडीएम न्यायालय कक्ष में कतार लगानी पड़ रही है। आवेदकों का कहना है कि हजारों आवेदनों के लिए एक मजिस्ट्रेट पर्याप्त नहीं। प्रशासन की लापरवाही के कारण हमें समस्या झेलनी पड़ रही है।
जन प्रहरी संस्था संयोजक नरोत्तम सिंह शर्मा का आरोप है कि नगर निगम की जगह तहसील से प्रमाण पत्र जारी होने से भ्रष्टाचार बढ़ गया है। जो काम पहले 500 रुपये में होता था। अब उसके लिए आवेदक को 5000 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। जो लोग मुठ्ठी गर्म नहीं कर पाते, उन्हें एक-एक साल तक चक्कर काटने पड़ रहे हैं। वहीं, इस संबंध में जिलाधिकारी मनीष बंसल का कहना है कि प्रमाण पत्रों की समस्या का जल्द हल निकाला जाएगा। आवेदकों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था की जाएगी।