आगरा। रिफ्यूजी फिल्म का गीत ‘पंछी, नदिया, पवन के झोंके, कोई सरहद न इन्हें रोके... चंबल सेंक्चुअरी की बाह रेंज में आने वाले साइबेरियन पक्षियों पर चरितार्थ हो रहा है। बर्फबारी से बचने एवं भोजन की तलाश में जापान, यूरोप, एशिया, सिंगापुर आदि देशों की सरहद लांघकर पेंटेड स्टॉर्क, ब्लैक हेडेड आईबिस, रुडी शेल्डक, शॉवलर, इंडियन स्कीमर, ब्लैक नेक्ड स्टॉर्क, रेड क्रेस्टेड पोचार्ड, बार हेडेड गूज आदि पक्षियों ने चंबल में डेरा डाल लिया है।
ये पक्षी 1000 किमी से अधिक दूरी तय कर यहां पहुंचते हैं। चंबल की प्राकृतिक खूबसूरती एवं साफ पानी की वजह से परिंदे चंबल की ओर खिंचे चले आते हैं। इनकी अठखेलियां पक्षी प्रेमियों को रोमांचित कर देती हैं। चंबल सफारी जरार के निदेशक आरपी सिंह ने बताया कि घड़ियाल, मगरमच्छ और डॉल्फिन के साथ दुर्लभ चिड़ियों को देखने के लिए विदेशी सैलानी खूब आते हैं। चंबल की जैव विविधता आगरा से बाह तक खींच लाती है।
बाह के रेंजर कुलदीप सहाय पंकज ने बताया कि प्रकृति एवं पक्षी प्रेमी और पक्षी देखने वाले हर साल 5 जनवरी को राष्ट्रीय पक्षी दिवस मनाते हैं। यह पक्षियों के सम्मान में मनाए जाने वाले कई दिवसों में से एक है। वन विभाग के संरक्षण के प्रयास एवं जागरूकता से चंबल नदी की जैव विविधता का दायरा बढ़ रहा है, पर्यटक आकर्षित हो रहे हैं। राष्ट्रीय पक्षी दिवस पर दोपहर बाद सूरज के दर्शन के साथ ही धूप सेंकने के लिए बालू पर घड़ियाल, कछुए निकले, पक्षी भी पंख फैला कर खूब उड़े।