जापान इंटरनेशनल कारपोरेशन एजेंसी (जायका) के तहत चंबल की जड़ी-बूटियों को नया जीवन मिल सकता है। चंबल पर निर्भर आबादी की दिशा और दशा सुधर सकती है। ललितपुर, झांसी, चित्रकूट, महोबा आदि जिलों की तरह चंबल में भी जड़ी-बूटियों की उपज के लिए लोगों को प्रेरित किया जायेगा।
जायका के परियोजना समन्वयक सुल्तान मेहंदी ने बताया कि जायका की वन प्रबंधन एवं निर्धनता उन्मूलन योजना के तहत जड़ी बूटी की उपज से निराश्रित और वन आश्रित समुदाय को जोड़कर उनकी आर्थिक सेहत संवारी जा रही है। जड़ी बूटी के उत्पादन को बढ़ावा मिल रहा है। अभी तक ललितपुर, झांसी, चित्रकूट, महोबा में ये परियोजना 10 सालों से चल रही थी। अगले वर्ष से यूपी के 30 जिलों समेत चंबल में जड़ी बूटी खेती से बीहड़ की आबादी को जागरूक किया जायेगा। उन्हें वन उपज के लिए समूह बनाकर प्रेरित किया जायेगा। ललितपुर के डिप्टी रेन्जर महेश कुमार तिवारी ने बताया कि अभी उनके इलाके में बल वर्धक सफेद मूसली, जोड़ों के दर्द से निजात दिलाने वाले अश्वगंधा, दुग्धवर्धक सतावक, डायबिटीज से मुक्ति दिलाने वाली गुड़मार की पत्ती आदि की उपज हो रही है। जिसको बेचने और लोगों को जागरूक करने के लिए बर्ड फेस्टिवल में स्टाल लगाया गया है।
दूसरे दिन पांच चिड़ियों को पहनाई रिंग
बाह। बर्ड फेस्टिवल में बॉम्बे नेशनल हिस्ट्री सोसायटी केरला के डा. एस बालाचन्द्रन ने शनिवार को पांच चिड़ियों को रिंग पहनाई। इस तरह बर्ड फेस्टिवल में अब तक 20 चिड़ियों की रिंगिंग की गई। इस दौरान देशी विदेेशी पक्षी विशेषज्ञों और छात्र-छात्राओं को रिंगिंग के संबंध में जानकारी दी गई। रिंगिंग के वक्त चिड़ियों की सेप और साइज का मूल्यांकन किया गया। जिससे पकडे़ जाने पर उनके व्यवहार और बदलाव का अध्ययन किया जा सके। देश की एक मात्र बर्ड रिंगिंग की संस्था होने का दावा करते हुए डा. एस बालाचन्द्रन ने बताया कि अब तक छह लाख चिड़ियों की रिंगिंग की जा चुकी है। पिछले बर्ड फेस्टिवल में 70 चिड़ियों की रिगिंग हुई थी। प्रदेश वन प्रबंध निदेशक एसके उपाध्याय ने भी रिंगिंग के बाद बर्ड को उड़ाया।
बर्ड वाचर को भायी ब्लैक नेक्ड स्टार्क
बाह। शनिवार को चंबल में ब्लैक नेक्ड स्टार्क बर्ड वाचर को खूब भायी। नन्दगवां घाट से हरलालपुरा की ओर आगे बढ़ते ही पानी पी रही ब्लैक नेक्ड स्टार्क चिड़िया दिखी तो देशी विदेशी पक्षी विशेषज्ञों की नजर उससे हटी नहीं। बाह के रेन्जर सर्वेश भदौरिया ने बताया कि दक्षिण पूर्व एशिया और आस्ट्रेलिया का यह पक्षी चंबल में पाया जाता है। इसके पंख 150 सेमी तक लंबे और फैलाव 90 सेमी तक होता है। औसतन चार किलोग्राम वजनी ब्लैक नेक्ड स्टार्क नवंबर में चंबल में घोंसला बनाती है। देशी विदेशी ब्लैक आइविस, कॉमडक, ब्रह्मीडक, कारमोरेन्ट, विस्लिंग टील, पेन्टेड स्टार्क, स्पूनविल आदि पक्षी देखने को मिले। वहीं, चम्बल सफारी जरार में उल्लू, चमगादड़, गैंगा, कबूतर, गौरेया, बुलबुल, तोते आदि देखने को मिले।
चिड़ियों की गैलरी बनी आकर्षण का केन्द्र
बाह। चिड़ियों की गैलरी शनिवार को देशी विदेशी विशेषज्ञों के साथ ही यहां पहुंचे लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र बनी रही। प्रमुख वन संरक्षक उमेन्द्र शर्मा, प्रबंध वन निदेेशक एसके उपाध्याय ब्रिटेन के बर्ड फेयर के जनक टिम अपलेटन, सांसद धर्मेन्द्र यादव के भाई अनुराग यादव चिड़ियों में दिलचस्पी रखने वाली उनकी पत्नी अभिलाषा यादव आदि की नजरें चिड़ियों की गैलरी में जमी रहीं। यूपी सरकार के सलाहकार आरपी सिंह ने उन्हें चिड़ियों के बारे में बताया।