मैनपुरी। निजीकरण के विरोध में मंगलवार को दूसरे दिन भी बिजली विभाग के कर्मचारी हड़ताल पर रहे। पावर हाउस में धरना देते हुए सरकार से आदेश वापस लेने की मांग की है।
बीते सप्ताह बिजली कर्मचारियों ने पूर्वांचल में बिजली विभाग का निजीकरण किए जाने का विरोध शुरू किया था। इसके लिए पहले चार दिन तक तीन घंटे सांकेतिक हड़ताल रखकर उन्होंने सरकार से आदेश वापस लिए जाने की मांग की थी। जब सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने संपूर्ण हड़ताल का निर्णय लिया।
सोमवार से शुरू हुई हड़ताल मंगलवार को भी जारी रही। अधिशासी अभियंता, उप खंड अधिकारी और अवर अभियंताओं समेत अन्य बिजली कर्मचारियों ने पावर हाउस परिसर में धरना दिया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक रजत शुक्ला ने कहा कि विभाग न केवल अपने लिए बल्कि जनता के लिए भी जंग लड़ रहा है।
निजीकरण से बिजली कीमतें कई गुना बढ़ जाएंगी। इससे आम आदमी को परेशानी होगी। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार निजीकरण के आदेश को वापस नहीं लेती है, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। अधिशासी अभियंता मागेंद्र अग्रवाल, जीसीएल भटनागर, आशीष गुप्ता, प्रतीक यादव, ओमप्रकाश, दीपचंद्र, सत्य नारायण, सतेंद्र कुमार, रजनीकांत राय, केके सोलंकी मौजूद रहे।
संविदाकर्मी संभाले व्यवस्थाएं
बिजली विभाग के अधिकारियों से लेकर कर्मचारी तक निजीकरण के विरोध में दो दिन से हड़ताल पर हैं। ऐसे में संविदा लाइनमैन आदि बिजली व्यवस्था संभाले हैं। उनके द्वारा ही फॉल्ट व अन्य शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है। जल्द ही इनके भी हड़ताल पर जाने की चर्चा है। ऐसे में लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।