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सपने बड़े, जेब छोटी : नई नीति ने जगाई उम्मीद की किरण

Mon, 07 Sep 2026 02:33 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
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आगरा। मैदानों पर पसीना बहाते समय युवाओं के मन में बड़े-बड़े सपने पलते हैं। मगर उन्हें पाने में कई बार परिवार की जेब छोटी पड़ जाती है और उनके सपने बिखर जाते हैं। महंगी खेल सामग्री, अकादमियों की भारी-भरकम फीस और प्रतियोगिताओं के खर्च के आगे प्रतिभाएं खेल छोड़ने को मजबूर हो जाती हैं। ऐसे में राष्ट्रीय खेल दिवस पर आई नई खेल नीति ने होनहारों के लिए उम्मीद की नई किरण जगाई है।
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आगरा में खेलों का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। अकेले क्रिकेट की लगभग 20 अकादमियां हैं, जबकि क्रिकेट समेत विभिन्न खेलों के कुल प्रशिक्षण केंद्रों की संख्या 40 से अधिक है। सिर्फ क्रिकेट में ही करीब एक हजार खिलाड़ी नियमित तौर पर पसीना बहा रहे हैं। इसके अलावा हॉकी, फुटबॉल, एथलेटिक्स, बैडमिंटन और कुश्ती जैसे खेलों में भी सैकड़ों युवा सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी मेहनत के दम पर भविष्य संवारने में जुटे हैं।
वरिष्ठ खिलाड़ी और जनपदीय क्रीड़ा सचिव डॉ. रिनेश मित्तल का कहना है कि नई नीति में केवल शहरी अकादमियों को ही नहीं, ग्रामीण अखाड़ों को भी आधुनिक बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। मैट, आधुनिक जिम उपकरण और योग्य कोच व प्रबंधकों की उपलब्धता से आगरा के ग्रामीण पहलवानों को पेशेवर अंदाज में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। साथ ही, अकादमियों का बुनियादी ढांचा मजबूत होने से खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मिल सकेंगी।
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खेल प्रेमियों का कहना है कि आगरा ने देश को हॉकी, क्रिकेट और कुश्ती जैसे खेलों में बेहतरीन खिलाड़ी दिए हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि यह सरकारी सहायता केवल फाइलों और कागजों तक सीमित न रहे। यहां प्रतिभाओं और सपनों की कोई कमी नहीं है, बस यह जरूरी है कि पैसों की तंगी किसी भी खिलाड़ी के रास्ते की आखिरी दीवार न बने।
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कई प्रतिभाओं को जूझते देखा
कोच के तौर पर मैंने कई प्रतिभाओं को पैसों की कमी से जूझते देखा है। हम अपनी ओर से मदद करते हैं लेकिन सरकार का यह कदम सराहनीय है। इससे जरूरतमंद खिलाड़ियों के टैलेंट को सही मंच और आगे बढ़ने का सहारा मिलेगा। - पूर्व इंडिया-ए क्रिकेटर और कोच केके शर्मा
महंगी फीस और किट न बने मजबूरी
महंगी फीस और किट का खर्च हर परिवार नहीं उठा सकता। यह मजबूरी नहीं बन जानी चाहिए। सरकार का सहयोग मिला तो गरीब परिवारों के खिलाड़ी भी केवल और केवल अपने खेल पर ध्यान दे सकेंगे। - युवा खिलाड़ी दीपक नरवार
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