प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बिचोला: किबाड़ को दीमक ने किया नष्ट
बाह। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिचोला का जर्जर भवन किसी भूत बंगले जैसा दिखता है। बारिश में अस्पताल की चहारदीवारी ढह गई थी। कमरों का फर्श धंस गया है। दीवारों में दरारें आ गईं। दीमक ने दरवाजों को खोखला कर दिया है। किबाड़ों के सिर्फ निशान बचे हैं। खिड़की, जंगलों का भी दरवाजों जैसा हाल है।
बिचोला के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन ही जर्जर नहीं है, इलाज का ढांचा भी दुरुस्त नहीं है। यहां पर चिकित्सक की तैनाती नहीं है। फार्मासिस्ट नीरज के भरोसे बिचोला, नींमडाडा, गुंगावली, रतीरामपुरा आदि 20 गांवों के लोगों का इलाज होता है। रात के वक्त कोई बीमार हो जाए, तो बाह तक की दौड़ लगानी पड़ती है। अस्पताल में मिले भरत शर्मा ने बताया कि करीब 14 साल पहले बने स्वास्थ्य केंद्र रखरखाव के अभाव में भूत बंगले जैसा दिखता है। दिन में फार्मासिस्ट नीरज इलाज करते हैं। रात के वक्त अस्पताल बंद रहता है। वैसे भी डर की वजह से कोई नहीं आता। इस संबंध में पूछे जाने पर बाह के अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र वर्मा ने बताया कि चिकित्सक की नियुक्ति नहीं है, बाउंड्री आदि की मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। चिकित्सक को लेकर भी उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बिचोला: किबाड़ को दीमक ने किया नष्ट