भजन गायक विनोद अग्रवाल बेहद सामान्य जीवन जीते थे। हास्य उनके जीवन का हिस्सा था। खाने में आमतौर पर परहेज नहीं करते थे। जलेबी देखकर मुंह में पानी आ जाता था तो गोलगप्पे भी शौक से खाते थे। आगरा के गोलगप्पे उन्हें बेहद पसंद थे।
मुरलीधर मनुहार संस्था के अध्यक्ष पुष्पेंद्र त्रिवेदी के मुताबिक जब विनोद अग्रवाल का कहीं आवागमन होता था और उन्हें आगरा होकर निकलना होता था तो वे कुछ देर आगरा में रुक कर ही जाते थे। पुष्पेंद्र त्रिवेदी के निवास पर रुकते थे।
वहां वे चूल्हे पर सिकी मिस्सी रोटी खाना पसंद करते थे। मिठाई में उन्हें जलेबी बेहद पसंद थी। कहीं भी जलेबी दिखी नहीं गाड़ी रुकवा देते थे। आगरा की चाट और गोलगप्पे खाने के भी शौकीन थे।