कासगंज। जिले की 17 लाख आबादी के लिए बेहतर इलाज आज भी सपना बना हुआ है। इसका मूल कारण महज 30 प्रतिशत चिकित्सकों की जिले में तैनाती होना हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की जिले में काफी कमी है। ऐसे में जिले के अधिकांश मरीज बाहरी जनपदों के डाक्टरों पर निर्भर रहते है।
जिले के लोगों के लिए बेहतर इलाज की सुविधा आज तक कोई भी सरकार नहीं दे सकी। सीएमओ के आधीन संचालित ब्लॉक स्तरीय एवं ग्रामीण स्तरीय स्वास्थ्य केंद्रों के हालत तो काफी बदतर है। ऐसे 36 स्वास्थ्य केंद्रों के लिए चिकित्सकों के 93 पद स्वीकृत हैं। लेकिन जिले में कुल 26 चिकित्सकों की ही तैनाती की गई हैं।
वर्ष 2008 में कासगंज को जिला बनाया गया, इसके साथ ही यहां के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलने की आस बंधी, लेकिन यह आस आज तक पूरी नहीं हो सकी। जिला अस्पताल के लिए 34 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। लेकिन तैनाती सिर्फ 13 चिकित्सकों की है। अस्पताल पर हृदय, त्वचा, फिजीशियन चिकित्सक तक नहीं है। जिससे मरीजों के लिए इलाज आसानी से नहीं मिल पाता। इलाज के लिए मरीज जूझते नजर आते हैं। जिले के प्राथमिक, सामुदायिक एवं जिला अस्पताल पर चिकित्सकों की कमी से मरीज काफी परेशान रहते हैँ। उनको सामान्य इलाज के लिए भी घंटों इंतजार करना पड़ता है। गंभीर बीमारियों के मरीज तो आगरा, अलीगढ, बरेली, दिल्ली जाने को मजबूर होते हैं।
एनआरएचएम से भी नहीं मिले पूरे चिकित्सक
कासगंज। शासन के स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) लागू किया गया। इसके तहत संविदा पर चिकित्सकों की तैनाती की व्यवस्था है। जिला अस्पताल पर इस मिशन के तहत नौ पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से तीन चिकित्सक ही वर्तमान में तैनात हैं।
जिले में चिकित्सकों के पदों के सापेक्ष तैनाती कम हैं, जिससे मरीजों को इलाज के समय समस्या तो आती है, लेकिन अस्पताल पर मरीजों को समुचित इलाज उपलब्ध कराया जाता है।- डाॅ. संजीव सक्सेना, सीएमएस
चिकित्सकों की कमी के बाद भी स्वास्थ्य केंद्रोंं पर आने वाले मरीजों को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं होने दी जाती। जो संसाधन मौजूद है उनसे बेहतर इलाज मरीजों को उपलब्ध कराया जाता डॉ. राजीव अग्रवाल, सीएमओ