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पहले डूब क्षेत्र का नक्शा, फिर बिल्डर्स पर फैसला

Thu, 26 May 2016 01:58 AM IST
अमर उजाला आगरा
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सील की गई इमारत के भीतर चल रहा अवैध निर्माण - फोटो : amarujala
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दयालबाग क्षेत्र में यमुना किनारे डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण मामले पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने बिल्डर्स को राहत देने से इनकार कर दिया है। एनजीटी ने कहा कि जब तक यमुना किनारे डूब क्षेत्र सीमांकन संबंधी पुख्ता रिकॉर्ड ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश नहीं किए जाते, तब तक वे कोई फैसला नहीं देंगे। इस मामले पर 31 मई को सुनवाई होगी।
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जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने बुधवार को याची डीके जोशी के मामले की सुनवाई की। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के जरिए यमुना किनारे डूब क्षेत्र की सीमांकन रिपोर्ट संबंधी नक्शा पेश किया गया। बेंच ने इस नक्शे को खारिज कर दिया। कहा कि इस नक्शे में खसरा संख्या स्पष्ट नहीं है। साथ ही जिन बिल्डर्स के प्रोजेक्ट पर सवाल हैं, उनकी डूब क्षेत्र से दूरी भी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में एक पुख्ता नक्शा ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश किया जाए।

डूब क्षेत्र सीमांकन नक्शे पर फंसा मामला
बेंच ने कहा कि डूब क्षेत्र सीमांकन का यह नक्शा मई 2016 में तैयार किया गया है। जबकि बिल्डर्स जिस आधार पर राहत की मांग कर रहे हैं उसका आधार एक कमेटी की रिपोर्ट है। बिल्डर्स का कहना है कि यह सीमांकन पहले किया गया था। वहीं, प्राधिकरण का कहना है कि सीमांकन एनजीटी के आदेश के बाद किया गया है।     
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मांगा था 25 साल में आई सबसे बड़ी बाढ़ का रिकॉर्ड
बेंच बीती कई सुनवाई से संबंधित प्राधिकरण से कह रहा है कि वह स्पष्ट बताएं कि बीते 25 वर्ष में आई सबसे बड़ी बाढ़ का उच्चतम स्तर कहां तक पहुंचा था। इस बाढ़ ने कितने क्षेत्र को प्रभावित किया था। उस आधार पर डूब क्षेत्र का सीमांकन किया गया या नहीं। बेंच ने यह आंकड़े सिंचाई विभाग से मांगे थे। अब मंगलवार को ट्रिब्यूनल ने सिंचाई विभाग से डूब क्षेत्र सीमांकन का नक्शा पेश करने को कहा है।

बिल्डर्स को बनाया पक्षकार
इस मामले में संबंधित बिल्डर्स जिन्हें एनजीटी ने नोटिस जारी किया था उन्हें भी पक्षकार बनाने के लिए याचिका दाखिल की गई है। एनजीटी ने इस याचिका पर विचार करने के बाद मामले में संबंधित बिल्डर्स को भी पार्टी बना दिया है।

यमुना में अपशिष्ट की निकासी
मालूम हो कि आगरा में यमुना किनारे कई प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई थी। इन पर आरोप था कि यहां से सीधे यमुना में अपशिष्ट और मलबे की निकासी की जा रही है। कई आवासीय प्रोजेक्ट डूब क्षेत्र में हैं। इसके बाद एनजीटी ने सभी प्रोजेक्ट पर रोक लगा दी थी। सुनवाई के दौरान बिल्डर्स की ओर से पेश वकील ने कहा कि प्रोजेक्ट पर स्टे यदि हटाया जाए तो वे शोधन यंत्र लगाने को तैयार हैं।
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