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गोमांस का विवाद ‘आर्टिफिशियल’ : मार्क टुली

Sun, 18 Oct 2015 01:52 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला अागरा
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दिल्ली में बीबीसी के 20 साल तक ब्यूरो चीफ रहकर भारतीय राजनीति को नजदीक से समझने वाले पत्रकार-लेखक मार्क टुली ने गोमांस विवाद को ‘आर्टिफिशियल’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि अगर आस्था और भावनाओं को ठेस लगे तो गोमांस न खाएं। वह खुद ब्रिटेन में भले गोमांस खा लें पर भारत में रहते नहीं खाते। क्योंकि एक तो कानून इसकी इजाजत नहीं देता और दूसरे वह किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहते।
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 ‘दक्षिण एशिया की चुनौतियों में भारत और पाकिस्तान की भूमिका’ विषय पर शनिवार को यहां शुरू हुए सार्क देशों के सेमीनार में हिस्सा लेने आए मार्क टुली ने दादरी प्रकरण और गोमांस विवाद को ‘आर्टिफिशियल’ और ‘मैन्यूफैक्चर्ड’ करार दिया। कहा कि दादरी प्रकरण की जांच में साफ हो चुका है कि गोमांस नहीं खाया गया था। केवल अफवाह फैलाई गई जो जानलेवा साबित हुई। टुली ने बताया कि वह दिल्ली में निजामुद्दीन इलाके में रहते हैं। उनके परिचित मुस्लिम गोमांस नहीं खाते। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कौन क्या खाए, यह निजी मामला है लेकिन इससे किसी समुदाय की आस्था को चोट पहुंचती है तो गोमांस नहीं खाना चाहिए।
देश में धार्मिक असहिष्णुता बढ़ने के आरोप लगाकर साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने को मार्क टुली ने पूरी तरह लेखकों का व्यक्तिगत मामला बताते हुए इस पर टिप्पणी करने से मना कर दिया। मुंबई में पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री की पुस्तक के विमोचन के दौरान सुधींद्र कुलकर्णी पर कालिख पोतने की घटना को उन्होंने जरूर शर्मनाक और आपत्तिजनक बताया। कहा कि सरकार को ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
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