बटेश्वर में घोड़े और ऊंटों का मेला खचाखच भरा है। राजस्थान के विभिन्न इलाकों से ऊंटों को लेकर व्यापारी मेले में पहुंचे हैं। यहां मारवाड़ी और बीकानेरी ऊंटों की खास मांग है। इन दिनों मेले में ऊंट और घोड़ों की बिक्री पूरे सवाब पर है।
बता दें कि उत्तर भारत का विख्यात बटेश्वर मेला 370 साल पुराना है। 1645 में तत्कालीन भदावर नरेश बदन सिंह ने मेले के आयोजन की परंपरा शुरू की थी। तब मेले में हाथी भी बिकने आते थे। सेना के लिए ऊंट और घोडे़ यही से खरीदे जाते थे लेकिन अब मेला क्षेत्रीय दायरे में सिमटा जा रहा है। इस बार राजस्थान की महिलायें भी ऊंट बेचने और खरीदने के लिए मेले में आई हैं। वे अपने ऊंटों पर दो-तीन दिन का चारा भी साथ लाई हैं। धौलपुर के मनिया क्षेत्र की सौमोती और केसर ने बताया कि पहाड़ी इलाके में वे भी ऊंटों को बोझा ढोने के लिए इस्तेमाल करती है। हालांकि पुरुष भी साथ हैं लेकिन वे अपनी पसंद का ऊंट खरीदने आई हैं। मेले में 10 से 50 हजार तक के ऊंट मौजूद हैं। ऊंट व्यापारी रामसिंह ने बताया कि मेले में मंदी छाई है। मेले में जिला पंचायत ने पानी और प्रकाश का भी इंतजाम नहीं किया है। इस कारण असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। मेले में घोड़ों की खरीद फरोख्त भी जमकर हो रही है।
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चोरी की घोड़ी बेचते पकड़ा बिजनौर का युवक
बाह। दिल्ली के संगम बिहार से घोड़ी चुराकर बटेश्वर के मेले में बेचने पहुंचे बिजनौर के चोर को पुलिस ने पकड़ लिया है। इस दौरान उसका साथी भीड़ को गच्चा देकर भाग निकला। मेले में बटेश्वर ढार के कमल सिंह यादव घोड़ी खरीदने आए थे। उन्हें दिल्ली के संगम बिहार निवासी अपने एक दोस्त की घोड़ी मेले में दिखायी दी। दोस्त के न मिलने पर उन्होंने उसे फोन लगाया। घोड़ी चोरी होने की जानकारी पर गांव के लोगों की मदद से उन्होंने खुद को बिजनौर का बता रहे युवक को घोड़ी समेत पकड़ लिया। जबकि उसका साथी भाग गया। इसी दौरान पीएसी के जवान वहां पहुंच गये। वे आरोपी युवक और बरामद घोड़ी को कोतवाली ले गए। वहां युवक से पूछताछ की गई। मेला कोतवाल इंसपेक्टर इंद्रजीत सिंह ने बताया कि घोड़ी के मालिक को दिल्ली से बुलाया गया है। उसके आने के बाद ही तस्वीर साफ हो सकेगी।