जुलाई में झमाझम बारिश हुई, लेकिन अगस्त में मानसून की चाल कमजोर रही। कान्हा के ब्रज में तो अगस्त में भी बादल मेहरबान रहे, लेकिन बाकी प्रदेश में सूखे जैसे ही हालात रहे। मानसून की दस्तक के बाद से 31 अगस्त तक प्रदेश के 25 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकी, जबकि 47 जिलों में सामान्य से बेहद कम बारिश हुई है। इसमें पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों की संख्या ज्यादा है। बुंदेलखंड के कुछ हिस्सों में बारिश बेहतर रही।
कान्हा के ब्रज पर बादल मेहरबान रहे हैं। पांच साल के बाद आगरा-मथुरा में यह पहला मौका है जब मानसून के पहले दो महीनों जुलाई और अगस्त में झमाझम बारिश रही हो, हालांकि जुलाई में ही लगभग तीन गुना बारिश हो चुकी थी, लेकिन अगस्त की विदाई के आखिरी दो दिनों में तेज बारिश ने अगस्त का कोटा भी पूरा कर दिया। जुलाई में आगरा में जहां 576.8 मिमी बारिश हुई तो अगस्त में यह 241 मिमी रही। दो महीनों में ही 717.8 मिमी बारिश ने पूरे साल का बारिश का कोटा पूरा कर दिया। आगरा की तरह ही मथुरा, एटा, कासगंज में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई तो वहीं, पड़ोसी जिलों में मैनपुरी सबसे सूखा रहा। मैनपुरी में सामान्य से 45 फीसदी बारिश कम हुई है। इसी तरह फीरोजाबाद में नौ फीसदी बारिश कम रिकार्ड की गई।
आगरा के आसपास मानसून का हाल
(एक जून से 31 अगस्त तक बारिश)
जिले बारिश
आगरा 717.8 मिमी
मथुरा 536.7 मिमी
एटा 701.7 मिमी
कासगंज 796 मिमी
अलीगढ़ 563 मिमी
हाथरस 501 मिमी
फीरोजाबाद 485.1
मैनपुरी 285.3
इन जिलों में सामान्य से बेहतर मानसून
प्रदेश में 25 जिलों में ही मानसून के दौरान अच्छी बारिश हुई है। इनमें अलीगढ़, आगरा, इलाहाबाद, आजमगढ़, बहराइच, बांदा, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर, शाहूजी महाराज नगर, श्रावस्ती, सोनभद्र, सुल्तानपुर, वाराणसी, मुरादाबाद, मथुरा, महोबा, ललितपुर, कासगंज, ज्योतिबा फुले नगर, हमीरपुर, एटा, बिजनौर, बरेली, बदायूं में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। एक जून से लेकर 31 अगस्त की अवधि में अधिकांश बारिश जुलाई की है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में कमजोर चाल
अंबेडकर नगर, अमेठी, बलिया, बलरामपुर, बाराबंकी, देवरिया, फैजाबाद, फर्रुखाबाद, फतेहपुर, गोंडा, जौनपुर, कन्नौज, कानपुर, कानपुर देहात, कुशीनगर, मऊ, महराजगंज, प्रतापगढ़, सीतापुर, सिद्धार्थ नगर, सीतापुर, लखनऊ, कौशांबी जैसे जिलों में मानसून की बारिश 76 फीसदी तक कम हुई है। प्रदेश के 47 जिलों में अगस्त तक बेहद कम बारिश ने किसानों के माथे पर पसीना ला दिया है।