संगीत सम्राट स्वामी हरिदासजी के लाडले ठाकुर श्रीबांकेबिहारी महाराज के प्राकट्योत्सव पर तीर्थनगरी वृंदावन में उल्लास, उमंग की अमृतमयी वर्षा हुई। बांकेबिहारी की प्राकट्य स्थली निधिवनराज मंदिर में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ ठाकुरजी के जयकारे गूंजे। इस दौरान माई री सहज जोरी प्रकट भई... आदि मंगल बधाई गाई गई। बिहार पंचमी पर अल सुबह से ही वृंदावन के कण-कण में ठाकुर श्रीबांकेबिहारी के जयकारे अनुगुंजित हो रहे थे। निधिवनराज मंदिर स्थित ठाकुर श्रीबांकेबिहारी महाराज की प्राकट्य स्थली में धार्मिक अनुष्ठान प्रारंभ हो गए। सुबह 5 बजे सेवायत भीकचंद गोस्वामी, बच्चू गोस्वामी और रोहित गोस्वामी सहित श्रद्धालुओं ने पीत वस्त्र पहन रखे थे। यहां वैदिक ऋचाओं के बीच दुग्ध, दही, शर्करा, मधु, घी, गंगाजल और यमुना जल आदि से ठाकुरजी की प्राकट्य स्थली का अभिषेक कर सुगंधित इत्रों से मालिश की। इस दिव्य क्षण में निधिवनराज स्वामी हरिदासजी और उनके आराध्य बांकेबिहारी के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो रहा था। मंदिर में मंगल समाज व बधाई गायन ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। हर कोई दर्शन को लालायित दिखा।