आगरा में बांग्लादेशी पहले भी पकड़े जा चुके हैं। वहां की फातिमा नामक महिला एत्माद्दौला में रहकर सब्जी बेचती थी। इस काम की आड़ में नकली करेंसी को भी खपाती थी। मामला सामने आने के बाद एनआईए ने जांच की थी। इसके बाद कई और महिलाएं खुफिया एजेंसियों के रडार पर आ गई थीं।
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नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी एनआईए ने 16 फरवरी, 2017 में एत्माद्दौला के सुशील नगर की रहने वाली फातिमा उर्फ लीची को गिरफ्तार किया था। वह बांग्लादेश के चापई नवाबगंज जिले की रहने वाली थी। वह बगैर वीजा के आई थी। शेर अली नामक व्यक्ति के साथ शादी करके रह रही थी। वह सब्जी बेचने का काम कर रही थी। उसका असली धंधा जाली करेंसी चलाने का था।
गलत जानकारी देकर पासपोर्ट बनवाया
फातिमा ने गलत जानकारी देकर पासपोर्ट भी बनवा लिया था। उसके पास जाली करेंसी चापई नवाबगंज का ही अनवार लेकर आता था। उसे पश्चिम बंगाल पुलिस ने 18 जनवरी 2016 को दो लाख की जाली करेंसी के साथ पकड़ा था। नोट ढाका की प्रिंटिंग प्रेस में छपे थे। नोट दिखने में असली जैसे थे।फातिमा से पूछताछ में कई और महिलाओं के नामों का पता चला था। यह आगरा, फिरोजाबाद की रहने वाली थीं। निगम के एक कर्मचारी की संलिप्तता की जानकारी मिली थी। सदर में भी गैंग पकड़ा गया था।
पुलिस के कई सवाल
पुलिस के कई सवाल हैं। जिन पर जांच की जा रही है। सेक्टर 14 में पकड़े गए बांग्लादेशी कब-कब भारत आए थे।? आने के बाद उनके संपर्क में कौन लोग आए? फर्जी दस्तावेज बनाने में किसने मदद की। यह लोग कहां-कहां रहे। क्या काम कर रहे थे?