आगरा। सत्र न्यायाधीश संजय कुमार मलिक ने दो सगी बहनों को अपने चंगुल में फंसाकर कोलकाता ले जाने वाले धर्मांतरण गैंग के चार आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। इनमें वजीरपुरा निवासी रहमान कुरैशी, दिल्ली के करहल नगर निवासी अब्दुल रहमान उर्फ महेंद्र पाल और उसके बेटे अब्दुल रहीम, अब्दुल्ला मोहम्मद शामिल हैं। इससे पहले इसी मामले में पांच आरोपियों की जमानत याचिका खारिज की जा चुकी है।
वादी ने थाना सदर में 24 मार्च को अपनी दो पुत्रियों के अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने दोनों बहनों को 18 जुलाई को कोलकाता की मुस्लिम बस्ती से मुक्त कराया था। पुलिस ने अवैध धर्मांतरण गैंग का पर्दाफाश कर 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। आरोपियों की गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने तमाम आपत्तिजनक साहित्य बरामद किया था। जमानत प्रार्थना पत्र की सुनवाई के दौरान डीजीसी राधाकृष्ण गुप्ता और वादी अधिवक्ता ने तर्क दिए कि आरोपी और उसके साथियों ने संगठित गिरोह के रूप में काम कर अवैध धर्मांतरण कराने का कार्य कर रहे थे। इसके साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए। जिससे उसके खाते में विदेशों से फंडिंग के तथ्य भी उजागर हुए। इस मामले में पूर्व में आरोपी एसबी कृष्णा उर्फ आयशा, रिथ बनिक, अब्दुल रहमान और जुनैश कुरैशी की जमानत अदालत से निरस्त हो चुकी हैं।