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खुलासा: ठेके पर कराई जा रहीं जमानत, तहसील से पुलिस तक की फर्जी रिपोर्ट, अपराध के हिसाब से रेट फिक्स

Wed, 24 Apr 2024 09:03 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा पुलिस ने ऐसे गिरोह का खुलासा किया है, जो जमानत पर भी ठेके पर करा रहा था। अपराध के हिसाब से रेट तय कर रखा था। इसके साथ ही इस गिरोह के द्वारा सेटिंग का खेल कुछ ऐसा था कि तहसील से पुलिस तक की फर्जी रिपोर्ट तैयार करा ली जाती थी। 

 
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फर्जी जमानतदार गिरोह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा में कोर्ट में फर्जी जमानतदार और दस्तावेज पेश कर 100 से अधिक अपराधियों की जमानत कराने वाले गैंग के सरगना सहित 7 को विशेष कार्य बल (एसटीएफ) और सदर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सरगना 40 हजार में अपराधियों की जमानत का ठेका लेता था। थाने, तहसील और आरटीओ सहित अन्य विभाग की रिपोर्ट तैयार करवाता था। फर्जी मुहर लगाकर कोर्ट में लगाता था। गैंग में 3 अधिवक्ता भी शामिल बताए गए हैं। गिरोह ने हाल ही में थाना सदर के गैंगस्टर अजय की जमानत कराई थी। मजदूरों को जमानतदार बनाकर पेश करते थे।
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सहायक पुलिस आयुक्त सदर पियूष कांत राय ने बताया कि इस बारे में सूचना पर एसटीएफ के निरीक्षक हुकुम सिंह, यतेंद्र शर्मा सहित सदर पुलिस ने छानबीन की। मंगलवार को राजपुर चुंगी से गैंग के 2 गुर्गों को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई। उनकी निशानदेही पर पांच और पकड़ लिए गए।



 

इनकी हुई गिरफ्तारी
पुलिस ने अश्वनी कुमार (राधेश्याम काॅलोनी, मारुति सिटी रोड, मूल निवासी रूपवास, भरतपुर, राजस्थान), सुनील कुमार (निवासी राधा नगर, बल्केश्वर), मयंक गुप्ता (निवासी भूड़ का बाग, शांति नगर, कमला नगर), मोहित गुप्ता (लोहिया नगर), प्रह्लाद कुमार (बल्केश्वर काॅलोनी), बंटी उर्फ उमाशंकर (निवासी ग्राम बुढ़ैरा, ताजगंज) और मेराज हुसैन (धूलियागंज, कोतवाली) को गिरफ्तार किया है।



 

ये हुई बरामदगी
129 आधार कार्ड, 24 मुहर, 35 वाहन, खसरा-खतौनी, रजिस्ट्रेशन-बीमा के दस्तावेज (सभी फर्जी), 1 लैपटॉप, प्रिंटर, पेन कार्ड, वाटर आईडी, 8 थाने-तहसील की रिपोर्ट, 21 जमानतदारों के सत्यापन की फर्जी रिपोर्ट, 49 बीमा-खतौनी फर्जी, 9 डेबिट कार्ड, 10 मोबाइल, 2 बाइक और 1 स्कूटर बरामद किया गया है। खतौनी धौलपुर, मुरादाबाद, कुरावली, मनिया आदि जिलों की हैं।

 

तीसरी बार पकड़ा गया सरगना अश्वनी
एसटीएफ के मुताबिक गिरोह का सरगना अश्वनी कुमार है। वह इंटरमीडिएट पास है। तकरीबन 5 साल से फर्जी जमानतदारों का गिरोह चला रहा है। 2 बार पहले भी पकड़ा गया था। उसने बताया कि वह अमूमन जेल में निरुद्ध आगरा से बाहर के जिलों के अपराधियों की जमानत का ठेका 30-40 हजार रुपये में लेता है। दीवानी में सक्रिय रहता है। लोगों की तलाश करता है। एसटीएफ निरीक्षक हुकुम सिंह ने बताया कि अश्वनी अब तक 100 से अधिक अपराधियों को जमानत दिला चुका है। जेल से छूटने के बाद अपराधी कोर्ट में पेश नहीं होते हैं। नोटिस देने पर जमानतदार भी फर्जी दस्तावेज लगे होने के कारण मिलते नहीं हैं।

 

अधिवक्ता का मुंशी तैयार करता था दस्तावेज
मेराज एक अधिवक्ता का मुंशी है। वह बीए पास है। घर पर लैपटॉप और प्रिंटर की मदद से फर्जी आधार कार्ड, खसरा-खतौनी, बीमा, वाहन रजिस्ट्रेशन, थाने व तहसील की फर्जी रिपोर्ट तैयार करता है। बंटी और प्रह्लाद मजदूरी करते हैं। अश्वनी दोनों का फोटो लगाकर आधार कार्ड तैयार करवाता था। वह फर्जी जमानतदार बनकर कोर्ट में पेश हो जाते थे। इसके बदले में उन्हें 500 रुपये, खाना और शराब की बोतल मिलती थी।

 

मदद करता था बल्केश्वर का कोचिंग संचालक
रोहित और सुनील का बल्केश्वर में मुहर बनाने का काम है। वह 500 से 700 रुपये में किसी भी विभाग की मुहर तैयार कर देते थे। मयंक कोचिंग संचालक है। वह हाईस्कूल तक के बच्चों को बल्केश्वर में पढ़ाता है। वह रोहित और सुनील का दोस्त है। तीनों मिलकर काम करते हैं। कोचिंग परिसर में ही आरोपी मुहर बनाने का भी काम करते थे।

 
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जमानतदारों के गिरोह में महिला भी शामिल
गिरोह ने हाल ही में सदर थाने के गैंगस्टर के आरोपी नैनाना जाट निवासी अजय की जमानत कराई थी। फर्जी जमानतदार कमल, हरिओम बने थे। कमल भानपुर, मनिया, धौलपुर निवासी निर्मल के रूप में और हरिओम को रामकिशन के नाम से पेश किया गया था। दोनों के आधार कार्ड में कमल और हरिओम के फोटो लगे हैं। गिरोह में 3 वकील भी शामिल हैं। एसटीएफ तलाश में जुटी है। पुलिस की पूछताछ में फतेहाबाद के हरिओम, कोलक्खा के कमल, सुशील नगर के अशोक और बेलनगंज की ममता का नाम भी सामने आया है। ये लोग फर्जी जमानतदार बनकर कोर्ट में पेश होते थे।
 
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