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चंबल नदी में नहाते समय चार डूबे, चचेरे भाइयों की मौत

Mon, 24 Apr 2017 01:22 AM IST
चंबल नदी में नहाते समय चार डूबे, चचेरे भाइयों की मौत
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चंबल नदी में नहाते समय चार डूबे, चचेरे भाइयों की मौत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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खेड़ा राठौर के नंदगवां घाट पर रविवार को सुबह लगभग आठ बजे नहाते समय चार किशोर चंबल नदी में डूब गये। चीख पुकार सुन नदी किनारे मौजूद स्थानीय गोताखोरों ने दो को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। लेकिन दो चचेरे भाइयों को जब तक बाहर निकालते उनकी मौत हो गई। दोनों के शव निर्माणाधीन पुल के नीचे से बरामद किये गये। घटना के बाद से दोनों के परिवारों में कोहराम मचा हुआ है।
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रविवार की सुबह खेड़ा राठौर के नंदगवां गांव के चचेरे भाई जितेंद्र (17) पुत्र भरत सिंह और शैलेंद्र (15) पुत्र वीरेंद्र सिंह गांव के दोस्त रोहन पुत्र भोले और गोलू पुत्र शिवचरन के साथ नंदगवां घाट पर चंबल नदी में नहाने के लिए गये थे। लगभग आठ बजे निर्माणाधीन पुल के लिए बने पहुंच मार्ग से नदी में कूद-कूदकर नहा रहे थे। इस दौरान चारों नदी के गहरे पानी में चले गये। किशोरों को डूबते देख घाट पर मौजूद लोगों ने चीख पुकार मचा दी। इस पर वहां आसपास मौजूद स्थानीय गोताखोर उन्हें बचाने के लिए नदी में कूद गए। उन्होंने रोहन और गोलू को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। जबकि लगभग दो घंटे की मशक्कत के बाद निर्माणाधीन पुल के पहुंच मार्ग के नीचे फंसे चचेरे भाइयों जितेंद्र और शैलेंद्र के शव बरामद कर पाए। सूचना मिलने पर खेड़ा राठौर पुलिस भी मौके पर पहुंच गयी। लेकिन परिवारीजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। दोनों चचेरे भाइयों के शव देखकर परिवार में कोहराम मच गया।
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मौत तक जारी रहा सेल्फी का क्रेज
बाह। चचेरे भाइयों की मौत तक चारों दोस्तों में सेल्फी का क्रेज जारी रहा। उन्होंने एक दो नहीं बल्कि दर्जनों सेल्फी लीं। निर्माणाधीन पुल के पहुंच मार्ग पर, नदी में छलांग लगाने के पाइंट पर, नहाते समय, निर्माणाधीन पुल के पिलर के पास सेल्फी ली गईं। यह सभी सेल्फी जितेंद्र के मोबाइल में सेव हैं। मौत तक जारी रही सेल्फी की कड़ी को देखने वाले भी रो पड़ते हैं।
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सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहे थे दोनों भाई
बाह। मृतक दोनों चचेरे भाई सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहे थे। जितेंद्र ने इस साल इंटरमीडिएट और शैलेंद्र ने 11वीं की परीक्षा दी थी। उनके साथियों ने बताया कि दोनों रोजाना सुबह दौड़ लगाने के लिए जाते थे। सेना में भर्ती होने का लक्ष्य बनाकर चंबल के बीहड़ में उछल कूद करते थे। जितेंद्र ने लंबीकूद की कई प्रतियोगिताएं भी जीती थी। देश की सीमा के पार से होने वाले हमले को लेकर देशभक्ति के जज्बे से लवरेज दोनों भाइयों का खून खौल जाता था। नन्दगवां घाट से एक साथ दोनों के शव घर पहुंचे तो हर कोई रो पड़ा। शव देखते ही शैलेंद्र की मां बबिता, जितेंद्र की मां बीना बेसुध हो गईं। होश आने पर उनके मुंह से अब सेना में कौन भर्ती होगा, यही शब्द निकल रहे हैं। शैलेंद्र के पिता भी बेटे की मौत की सूचना पर गश खाकर गिरे और बेहोश हो गये। जितेंद्र के पिता भरत सिंह का भी बेटे का शव देखकर बुरा हाल था।
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कुल दीपक था शैलेंद्र
बाह। शैलेंद्र कुमार वीरेंद्र सिंह के घर का कुल दीपक था। तीन बहनों के बीच वह अकेला भाई था। यही वजह थी कि बेटे का शव देखने वाली न तो मां और न पिता की बेहोशी टूट रही थी। वहीं, दूसरे मृतक जितेंद्र का एक बड़ा भाई सतेंद्र है।
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