बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर
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आगरा में 68 साल पहले 18 मार्च, 1956 को आगरा के रामलीला मैदान में दिए गए ऐतिहासिक भाषण के बाद बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने चक्कीपाट में जिस जगह बुद्ध विहार का उद्घाटन किया, उसी में उनका अस्थि कलश रखा गया है। बाबा साहब के परिनिर्वाण दिवस के मौके पर शुक्रवार (आज) को उनके अनुयायी अस्थि कलश के दर्शन कर सकेंगे। साल में सिर्फ इसी दिन बाबा साहब के अस्थि कलश के दर्शन किए जा सकते हैं।
संविधान शिल्पी भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर का परिनिर्वाण दिवस 6 दिसंबर को है। 18 मार्च, 1956 को रामलीला मैदान में यूपी शिड्यूल कास्ट फेडरेशन की सभा के बाद चक्कीपाट में भगवान बुद्ध की प्रतिमा स्थापित कर बुद्ध विहार का उद्घाटन बाबा साहब ने किया था। 6 दिसंबर, 1956 को उनके निधन के बाद 13 फरवरी, 1957 को बाबा साहब के पुत्र यशवंत राव आंबेडकर चक्कीपाट के उसी बुद्ध विहार में अस्थि कलश लेकर पहुंचे। तब जापानी बौद्ध भिक्षु और सोहनलाल शास्त्री ने बाबा साहब का अस्थि कलश बाबा साहब की ओर से स्थापित की गई भगवान बुद्ध की प्रतिमा के चरणों में रखा गया।
आंबेडकर अनुयायी करतार सिंह भारतीय के मुताबिक रामलीला मैदान में हुई सभा में ही बाबा साहब ने बौद्ध धर्म स्वीकार करने के संकेत दिए थेे। वह दो बार आगरा आए थे। आगरा के जूते और चमड़े के उत्पादों को उन्होंने रेलवे की प्राथमिकता में शुमार कराया था।
दो पूरी हुईं, तीसरी इच्छा अधूरी है
अमर उजाला के 19 मार्च, 1956 के अंक में डॉ. आंबेडकर की रामलीला मैदान में हुई जनसभा को प्रकाशित किया गया था। चिंतक राजकुमार नागरथ ने बताया कि इस सभा में बाबा साहब ने कहा था कि मेरी दो इच्छाएं पूरी हुईंं। उनकी दो इच्छाएं थीं कि शिक्षा और नौकरी के दरवाजे बिना भेदभाव के दलितों के लिए खुलें। तीसरी इच्छा के लिए उन्होंने कहा था कि ग्रामीण क्षेत्रों में अछूतों की सामाजिक हालत सुधारी जाए। जिस गांव में सम्मान न मिले तो उसे त्याग दो और जहां बंजर जमीन मिले, वहां बस जाओ।
सुबह से शाम तक होंगे दर्शन
चक्कीपाट बुद्ध विहार से जुड़ेे और भीमनगरी कमेटी अध्यक्ष धर्मेंद्र सोनी ने बताया कि शुक्रवार को सुबह 8 बजे से बाबा साहब के अस्थि कलश के दर्शन किए जा सकेंगे। शाम तक बुद्ध विहार में कार्यक्रम होते रहेंगे। महिलाओं को शॉल वितरण का कार्यक्रम किया जाएगा। मान्यवर कांशीराम जयंती समिति की ओर से श्रद्धांजलि कार्यक्रम होगा।