एक अभ्यर्थी का नाम सीताराम और दूसरे का अतुल कुमार था। इनके प्रमाणपत्र पकड़े जाने की सूचना पर साक्षात्कार के लिए पहुंचे बाकी अभ्यर्थी भी फरार हो गए। सीताराम और अतुल भी भाग निकले। इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकी।
विश्वविद्यालय के जन संपर्क अधिकारी डॉ. गिरजाशंकर शर्मा का कहना है कि साक्षात्कार में सख्ती बढ़ा दी गई है। प्रमाणपत्रों की बाकायदा जांच के बाद ही अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में शामिल किया जा रहा है।
एमसीएस एजुकेशनल इंस्टीट्यूट खैर, अलीगढ़ में बीएड पाठ्यक्रम को पढ़ाए जाने के लिए सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति के लिए आजमगढ़ के अभय यादव ने यूजीसी नेट का फर्जी प्रमाणपत्र लगाया था। उसने स्वीकार किया था कि फर्जी प्रमाणपत्र बनाने का रैकेट चल रहा है। ऐसे ही एमएड का फर्जी प्रमाणपत्र एक ही कॉलेज के नाम से दो अभ्यर्थियों ने प्रस्तुत किए, जो लोग भाग गए, वह भी संदेह के घेरे में हैं।
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