मैनपुरी। जिले की नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए प्रशासन द्वारा की गई पहल रंग लाने लगी है। बारिश में ये नदियां पानी से भर जाएंगी। विलुप्त हो चुकी अवा गंगा नदी में दशकों बाद पानी हिलोरें लेगा तो वहीं सालों से प्यासी सेंगर नदी की भी प्यास बुझ जाएगी।
जिले में कुल चार नदियां बहती हैं। इनमें शहर के बीचों-बीच से ईशन नदी, घिरोर क्षेत्र में अरिंद और सेंगर नदियां, बरनाहल और करहल क्षेत्र में अवा गंगा नदी बहती है। इसमें अवा गंगा जहां विलुप्त हो चुुकी थी वहीं सेंगर अस्तित्व के लिए जंग लड़ रही थी। दोनों को प्रशासन ने पुनर्जीवित करने के लिए पहल की है। मुख्य विकास अधिकारी ईशा प्रिया की पहल पर अवा गंगा नदी का सीमांकन कर खोदाई कराई जा रही है। बरनाहल और करहल क्षेत्र से होकर गुजरने वाली नदी में 50 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है। बारिश होने के साथ ही इसमें जल धारा प्रभावित होगी। वहीं सेंगर नदी की भी सफाई का काम कराया गया है। बीच-बीच में सेंगर नदी की पटरी टूटने ये इसका अस्तित्व खतरे में पड़ा गया था। अब काम होने के चलते बारिश में पानी आएगा।
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हजारों परिवारों को मिला रोजगार
अवा गंगा नदी की खोदाई के चलते हजारों परिवारों को रोजगार मिला। बीते छह माह से लगातार बरनाहल और करहल क्षेत्र के श्रमिकों से मनरेगा के तहत नदी की खोदाई का काम कराया जा रहा है। इससे श्रमिकों को रोजगार मिला और उन्हें पलायन नहीं करना पड़ा।
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अवा गंगा नदी की खोदाई का कार्य मनरेगा से कराया जा रहा है। तेेजी से कार्य कराने के लिए खंड विकास अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं। बारिश से पहले-पहले कार्य पूरा करने का लक्ष्य है।
-ईशा प्रिया, मुख्य विकास अधिकारी।