बेलगाम दौड़ रहे आटो ने शहर के ट्रैफिक व्यवस्था ध्वस्त कर दी है। ज्यादातर टेंपो का न तो रूट निर्धारित है और न ही कोई स्टैंड। कहीं भी खड़े होकर सवारियां भरना और उतारने के कारण जाम लगता है। हजारों की संख्या में दौड़ रहे टेंपो और आटो में महज आठ हजार पर ही परमिट है। संभागीय परिवहन विभाग इससे बेखबर है।
सिकंदरा चौराहा स्थित सिकंदरा स्मारक के सामने आटो चालकों का जमावड़ा लगा रहता है। चौराहे से सवारियां भरने के कारण कई बार हादसे भी हो चुके हैं लेकिन ट्रैफिक पुलिस इन्हें हटाने की जहमत नहीं उठाती है। खंदारी बाईपास चौराहे पर निर्माणाधीन फ्लाईओवर के कारण सर्विस रोड पर वाहनों का दबाव रहता है। लायर्स कालोनी के मोड़ पर और मऊ रोड पर दोनों ओर आटो चालक सड़क को घेरकर सवारियां भरते हैं। भगवान टाकीज चौराहे पर तो टेंपो की भरमार है। न्यू आगरा थाने के सामने, भगवान टाकीज के सामने, खंदारी रोड और नगला पदी रोड पर आटो के कारण रोजाना जाम की समस्या बनी रहती है। वाटर वर्क्स चौराहा भी इससे अछूता नहीं है।
शहर में नहीं है आटो स्टैंड
शहर में कोई आटो स्टैंड नहीं है। ऐसे में आटो चालक ट्रैफिक पुलिस को सुविधा शुल्क देकर लोगों की परेशानी का सबब बने हुए हैं। पूर्व में भगवान टाकीज ओवरब्रिज के नीचे आटो स्टैंड बनाया गया था पर अब चालक यहां आटो खड़े नहीं करते।
रूट नहीं निर्धारित
जिले में टेंपो का कोई रूट निर्धारित नहीं हैं, जिसके चलते चालक अब अपनी सुविधा के हिसाब से किसी भी रूट से सवारियां बैठा लेते हैं। आरटीए की बैठक में हर रूट के लिए अलग रंग के आटो पर विचार हुआ था पर यह फैसला बैठक तक ही सीमित रहा।
मात्र 8039 को ही परमिट, दौड़ रहे 15 हजार से ज्यादा
आरटीओ के रिकार्ड के मुताबिक, जिले में 8039 टेंपो ही रजिस्टर्ड हैं पर शहर में इनकी संख्या दस हजार से ज्यादा है। जबकि ग्रामीण अंचल में दौड़ने वाले टेंपो इनसे अलग है। अकेले सिकंदरा से रामबाग तक ही 400 से ज्यादा टेंपो का संचालन होता है। बिजलीघर चौराहे से तकरीबन 800 आटो का संचालन हो रहा है।
टेंपो के एरिया निर्धारित हैं। इसके बाद भी वे अन्य रूटों पर संचालित किए जा रहे हैं तो इसकी चेकिंग कराई जाएगी।
अनिल कुमार
आरटीओ (प्रवर्तन)