कासगंज। आईएसआई कनेक्शन के आरोप में गिरफ्तार जिनौल गांव के शैलेंद्र की निगरानी एटीएस बीते छह माह से कर रही थी। पुलिस को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी। हालांकि खुफिया टीमें जरूर शैलेंद्र को लेकर सक्रिय थीं। सबकुछ गोपनीय तरीके से चल रहा था।
शैलेंद्र को गिरफ्तार करने के बाद जब एटीएस ने मामले का खुलासा किया तो सभी हैरत में आ गए। परिवार के लोगों को भी कोई जानकारी नहीं थी। लोकल खुफिया तंत्र भी एटीएस की सूचना के आधार पर इस मामले को लेकर सक्रिय है। एटीएस को इस मामले और क्या साक्ष्य मिले हैं यह अभी सामने नहीं आ सका है। एटीएस की टीम शैलेंद्र को रिमांड पर लेकर इस मामले में आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
वर्जन
- 6 माह पहले से ही एटीएस की टीम इस मामले को लेकर जांच पड़ताल में जुटी थी। इसके बाद युवक की गिरफ्तारी की गई है। पुलिस के द्वारा इस मामले कोई कार्रवाई नहीं की है। प्रारंभिक जांच पड़ताल और आपराधिक इतिहास के बारे में जानकारी जुटाई है- दीप कुमार पंत, सीओ, पटियाली।
शैलेंद्र को लेकर गांव में लगातार चल रहा चर्चाओं का दौर
कासगंज। आईएसआई कनेक्शन के मामले में गिरफ्तार जिनौल गांव निवासी शैलेंद्र को लेकर जिनौल गांव के साथ आसपास के गांवों के लोग भी चर्चा कर रहे हैं। साथ ही ग्रामीणों की निगाहें अब एटीएस की कार्रवाई पर टीकी है। क्योंकि अब अगले चरण में एटीएस की टीम शैलेंद्र को रिमांड पर लेकर और पूछताछ करेगी। दूसरी तरफ उसके परिजन अब शैलेंद्र को बेकसूर बता रहे हैं। उनका कहना है कि शैलेंद्र कोई जासूस नहीं है। वह अरुणांचल प्रदेश में काम कर रहा था।
परिजनों का कहना था कि शैलेंद्र के पास चोरी की मोबाइल होने का आरोप लगाकर कुछ लोग अपने साथ ले गए थे। उन्हें इस बात की जानकारी भी बाद में मिली कि वह एटीएस के थे। जनौल के अलावा आस पास के गांव के लोग भी शैलेंद्र की गिरफ्तारी को लेकर चर्चाएं कर रहे हैं। गांव के मुकेश कुमार का कहना है कि सच्चाई तो वह नहीं जानते, लेकिन गांव में कभी ऐसा नहीं लगता था कि शैलेंद्र इस तरह के आरोप से घिरेगा।