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परस्पर विरोधी ग्रहों की युति का सिलसिला फिर शुरू, ज्योतिषाचार्य ने बताया अमंगलकारी

Sat, 27 Mar 2021 12:07 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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देश में एक बार फिर कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। इससे लोगों की चिंता फिर बढ़ गई है। ज्योतिषाचार्य का कहना है कि आने वाले दिनों में महामारी का प्रभाव कम होता नहीं दिख रहा। ऐसे में लोगों को स्वस्थ और सुरक्षित जीवन जीने की कला अवश्य ही सीख लेनी चाहिए। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का प्रयास भी करते रहना चाहिए। 

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ज्योतिषाचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा ने बताया कि संहिता ग्रंथों के अनुसार गुरु अतिचारी व शनि वक्री हो तो संसार मे हाहाकार मचता है। शनि, मंगल व गुरु की मकर राशि में युति ने लोगों के कष्टों को बढ़ाया। 24 जनवरी 2020 को शनि ने मकर, मंगल ने 22 मार्च व गुरु ने 29-30 मार्च 2020 की रात को मकर राशि में प्रवेश किया था। 

गुरु एक राशि में सामान्यतः 13 माह तक गोचर करता है। लेकिन गुरु ने अपनी चाल में अतिचारी होकर 13 माह का सफर मात्र पांच माह में पूरा किया। संहिता ग्रन्थों में उल्लेख है कि यदि देवराज गुरु एक वर्ष में तीन राशियों को स्पर्श कर ले तो वह वैश्विक महामारी के साथ गम्भीर आर्थिक समस्या निर्मित करता है, और हुआ भी वही।

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ज्योतिषाचार्य रामचंद्र शर्मा वैदिक - फोटो : अमर उजाला
14 मई 2020 को गुरु मकर हुए थे वक्री
ज्योतिषाचार्य के अनुसार 11 मई को शनि और 14 मई 2020 को गुरु मकर में वक्री हुए। मकर में गुरु का वक्री होना आंशिक राहत का संकेत देता है। मई माह से 22 जून के बीच कोरोना वायरस को समाप्त करने पर वैश्विक स्तर पर शोध और वैक्सीन तैयार  करने की योजना बनी। 30 जून को गुरु ने वक्री होकर खुद की धनु राशि में प्रवेश किया। धनु राशि प्रवेश के साथ ही गुरु की नकारात्मकता धीरे धीरे कम होने लगी। 

धनु के गुरु ने कुछ सकारात्मक परिणाम देना प्रारम्भ किए थे। गुरु वायु का कारक है। यह हवा के साथ स्वसन प्रणाली का भी प्रतिनिधित्व करता है। यही कारण है कि अतिचारी गुरु का नीच मकर राशि की और आकर्षण अति भयंकर संक्रामक रोग कोरोना के जन्म का  कारण बना। धनु में भी देवराज गुरु वक्री ही रहे जो 13 सितंबर को मार्गी हुए। 

इस प्रकार ज्योतिषीय विश्लेषण से यह कहा जा सकता है कि इस वैश्विक महामारी से राहत का धीमा सिलसिला 13 सितंबर को गुरु के मार्गी होने के बाद ही   प्रारम्भ हुआ। संक्रामक बीमारी का संबंध राहु से भी है। राहु ने  राशि परिवर्तन कर वृषभ  में  प्रवेश किया कुछ राहत के संकेत बनने लगे।    
 
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परस्पर विरोधी ग्रहों की युति का सिलसिला फिर शुरू 
ज्योतिषाचार्य के अनुसार शनि प्रधान राशि में परस्पर विरोध ग्रहों के सम्मिलन का सिलसिला दोबारा प्रारम्भ होने लगा। 14 जनवरी से 31 जनवरी 2021 तक  शनि, गुरु, सूर्य व शुक्र की युति बनी, 4 फरवरी से 8 फरवरी तक पंचग्रही युति बनी। 9 फरवरी  2021 से छह ग्रहों की युति ने पुनः अपना प्रभाव बताना प्रारम्भ किया। इस दरम्यान महामारी का प्रभाव भी बढ़ने लगा है। 
  
उनका कहना है कि आगे राहु के साथ मंगल ने युति कर इसे अमंगलकारी बना दिया। यह युति 13 अप्रैल तक रहेगी। संयोग से 13 अप्रैल से भारतीय नववर्ष विक्रम 2078 का भी आरम्भ हो रहा है। वर्ष मंगलवार से प्रारंभ हो रहा है। नववर्ष में दशाधिकारियों (ग्रहों के मंत्री मंडल) में छः पद अशुभ व चार पद शुभ ग्रहों के आधिपत्य में रहेंगे। 

वर्ष के नामकरण को लेकर भी पंचांगकारों में मतभेद दिखाई दे रहे है। कुछ नए वर्ष का नाम 'राक्षस' बता रहे हैं तो कुछ आनंद। यदि हम ग्रह गोचरीय स्थितिपर विचार करें तो आने वाला भारतीय नववर्ष भी कुछ राहत देता दिखाई देता नहीं लगता है। ग्रह गोचर तीन माह बाद तक कोरोना महामारी से राहत मिलने के संकेत मिलते नहीं दे रहे हैं। 
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