समरकंद की चारबाग शैली के पहले बगीचे रामबाग से सटी नूरजहां की सराय का संरक्षण इस साल शुरू किया जाएगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इसके एक ओर के ढह चुके हिस्से को संरक्षित करने के लिए 60 लाख रुपये खर्च करेगा। इसका प्रस्ताव दिल्ली मुख्यालय भेजा जा चुका है। मुगल बादशाह जहांगीर की बेगम नूरजहां ने व्यापारियों की सुविधा के लिए यमुना किनारे 32 खंभा और रामबाग के बीच में यह सराय बनवाई थी। यहां तीन हजार लोग और 500 घोड़ों के रुकने की व्यवस्था की गई थी।
रामबाग चौराहे से महज 300 मीटर दूर हाथरस रोड पर स्थित हनुमान मंदिर से सटी गली नूरजहां की सराय तक पहुंचाती है। मुगल शहंशाह जहांगीर के काल में यमुना नदी के किनारे आगरा आने वाले व्यापारियों की सुविधा के लिए यह सराय नूरजहां ने तैयार कराई थी। इस स्मारक में दो विशाल द्वार हैं। एक यमुना किनारे और दूसरा हाथरस रोड पर है। मुख्य प्रवेश द्वार के भीतर कभी पक्की दुकानों का बाजार सजा करता था। 15 साल पहले तत्कालीन संरक्षण सहायक सर्वेश कुलश्रेष्ठ के कार्यकाल में एक ओर 28 दुकानें संरक्षित की जा चुकी हैं, लेकिन दूसरी ओर का हिस्सा ढहकर मलबे में बदल चुका है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने आसपास की बस्तियों के गंदे पानी की निकासी के लिए इसी स्मारक के बीच से नाले की जगह पाइप डलवाए थे। हाथरस रोड वाले मुख्य प्रवेश द्वार का संरक्षण कराया गया था और यहां से करीब चार फीट तक मिट्टी हटाई गई थी, जिसके बाद मूल फर्श नजर आया था। यमुना किनारे वाले दूसरे प्रवेश द्वार की दुर्दशा है और कई जगह से यह गिरने की हालत में पहुंच चुका है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. स्मिथा कुमार ने बताया कि खंडहर में तब्दील हो चुके नूरजहां की सराय के हिस्से की थ्री-डी मैपिंग की गई है। इसका प्रस्ताव मुख्यालय भेजा गया है। मंजूरी मिलने पर इसी साल संरक्षण शुरू किया जाएगा।