गर्भवती व जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य पर नजर रखने के साथ आशा कर्मियों पर अब नॉन कम्युनिकेबल डिजीज (गैर संचारी रोगों) पर नजर रखने की जिम्मेदारी होगी। एनपीसीडीसीएस के अंतर्गत आशा कर्मी कैंसर, मधुमेह, हृदयवाहिका रोग और लकवा आदि के मरीजों की लक्षणों व सामान्य जांच के आधार पर ऐसे मरीजों को चिह्नित करेंगी, इसके लिए उन्हें स्पेशल ट्रेनिंग दी जाएगी।
चिह्नित मरीजों की सीएचसी-पीएचसी या एनसीडी क्लीनिक पर पुन: स्क्रीनिंग के बाद इलाज के लिए जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाएगा। सीएमओ डॉ. एसके दीक्षित का कहना है कि अभी कुछ हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर शुरू हो गए हैं। धीरे-धीरे सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की शुरुआत हो जाएगी। गांव में भी स्क्रीनिंग कार्यक्रम चलाया जाएगा।
2015 में ऐसे मरीजों की स्क्रीनिंग के लिए जिला अस्पताल सहित अन्य स्थानों पर एनसीडी क्लीनिक खोली गईं। अब स्क्रीनिंग पर जोर देते हुए आशाओं को यह जिम्मेदारी दी जाएगी। गैर संचारी मरीजों की खोज सब-सेंटरों को परिवर्तित कर बनाए जा रहे हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से जुडे़ गांवों में होगी। 30 वर्ष से ऊपर उम्र के लोगों की स्क्रीनिंग की जाएगी।