- पंचकल्याण महोत्सव के दौरान उपवन मंदिर में बोले जैन मुनि
संवाद न्यूज एजेंसी
मैनपुरी। शहर के कुंडलग्राम (उपवन मंदिर) में पंचकल्याणक महोत्सव मनाया जा रहा है। पांचवें दिन उपाध्याय विहसंतसागर ने सूर्य मंत्र का उल्लेख करते हुए बताया कि सूर्य मंत्र प्रतिमा का मुख्य मंत्र है, जिसको देते ही पाषाण की प्रतिमा भगवान बन जाती है।
महोत्सव स्थल पर मंगलवार को श्री जी का अभिषेक और पूजन सभी इंद्रों और इंद्राणियों के स्वरूपों के साथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा कर पंडित आशीष और अभिषेक जैन ने कराया। शांतिधारा गौरव जैन पंजाबी कॉलोनी परिवार के द्वारा उपाध्याय विहसंत सागर ससंघ के सानिध्य में संपन्न हुई। मेडिटेशन गुरु ने प्रवचन देते हुए कहा कि आहार दान बिना नवधा भक्ति के नहीं होता।
आहार दान में नवधा भक्ति जरूरी है, नवधा भक्ति में पाद प्रक्षालन, उच्चासन, पूजन, नमोस्तु, मनशुद्धि, बचनशुद्धि, आहार शुद्धि जरूरी है। जिस श्रावक श्राविका में यह 16 गुण होते हैं वही मुनिराज को आहार दे सकता है। हम सब का अपार पुण्य है जो की निग्रंथ मुनि को आहार देने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। मुनिराज वर्धमान को प्रथम आहार देने का सौभाग्य आलोक जैन बॉबी, सत्येंद्र कुमार जैन परिवार को मिला। उसके पश्चात सभी इंद्र इंद्राणियों और श्रावक श्राविकाओं ने मुनिराज को आहार देकर अपना पुण्यार्जन किया।
रूपेश जैन ने भजन सुनाकर लोगों को किया मंत्रमुग्ध
इंदौर से आए रूपेश जैन एंड पार्टी ने कुंडल ग्राम में पहुंचकर मेडिटेशन गुरु विहसंत सागर का आशीर्वाद प्राप्त किया। यहां भजन संध्या कार्यक्रम का भी आयोजन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत नवकार मंत्र के भजन के साथ हुई। नव निर्मित महावीर जिनालय विसातखाना पर त्वरित भजन लिखकर गाकर लोगों को नृत्य करने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम में अपने चर्चित भजनों को सुना कर उपस्थित जन समूह की वाहवाही लूटी। और अपने दादू रविंद्र जैन को याद करते हुए उनके भजनों को अपना स्वर देते हुए कहा कि हमारे गायन कला को आगरा मंडल में लाने का श्रेय पंडित कमल जैन मैनपुरी को जाता है।