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Agra: स्वीकृति के इंतजार में अमान्य हो गईं शस्त्र लाइसेंस की 6500 फाइलें, आवेदकों को दोबारा करने होंगे आवदेन

Fri, 02 Dec 2022 03:18 PM IST
मुकेश कुमार देशदीपक तिवारी, अमर उजाला आगरा

सार

पुलिस जांच व रिपोर्ट के बाद वर्षों तक फाइलें कलेक्ट्रेट में धूल फांकती रहीं। स्वीकृति के इंतजार में शस्त्र लाइसेंस के आवेदन अमान्य हो गए।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शस्त्र लाइसेंस की स्वीकृति के इंतजार में आगरा जिले में 2019 से 2022 तक तीन साल में 6500 फाइलें अमान्य हो गईं। पुलिस जांच व रिपोर्ट के बाद वर्षों तक फाइलें कलेक्ट्रेट में धूल फांकती रहीं। शस्त्र लाइसेंस नहीं बने। पुलिस रिपोर्ट के बाद छह महीने तक फाइलें मान्य होती हैं। छह महीने बाद नए सिरे से आवेदक को फाइल की जांच व सत्यापन कराना पड़ता है।

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सूबे में पहली बार योगी सरकार बनने के बाद 2018 में शस्त्र लाइसेंस को लेकर कवायद शुरू हुई। परंतु उच्च न्यायालय का 2013 का आदेश कि ‘सिर्फ अपराध पीड़ितों के लिए ही लाइसेंस जारी किए जाएं’, शस्त्र लाइसेंस की आस लगाए लोगों के आड़े आ गया। जिसके बाद जिलाधिकारी सिर्फ जरूरतमंद व चुनिंदा लोगों के लाइसेंस स्वीकृत किए। 

कलेक्ट्रेट स्थित आयुध विभाग की रिपोर्ट के अनुसार तीन साल में करीब सात हजार आवेदन प्राप्त हुए थे। जिनमें करीब 475 आवेदन पुन: जांच के लिए लंबित हैं। बाकी 6500 से अधिक आवेदन समय सीमा खत्म होने के कारण अमान्य हो गए। दिसंबर 2020 में तत्कालीन डीएम एनजी रवि कुमार ने कुछ जरूरतमंद लोगों के लिए लाइसेंस जारी किए थे। जिनकी संख्या 20 से 25 हो सकती है।

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600 रुपये का बिका था फॉर्म

अस्त्र-शस्त्र व्यापार समिति के अध्यक्ष सुरेश पालीवाल ने बताया कि 2019 में शस्त्र लाइसेंस आवेदन हुए थे। तब कलेक्ट्रेट से प्रति फार्म 600 रुपये का बिका था। इस तरह सरकार को शस्त्र लाइसेंस के फॉर्म बेचने पर ही करीब 40 लाख रुपये से अधिक राजस्व प्राप्त हुआ। लाइसेंस नहीं बने और आवेदन भी निरस्त हो गए।

छह महीने होती है मियाद

एडीएम सिटी एवं आयुध प्रभारी अंजनी कुमार सिंह ने बताया कि शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन फाइल की मियाद छह महीने तक होती है। यदि छह महीने में लाइसेंस नहीं बनता तो दोबारा सत्यापन व जांच करानी पड़ती है। नए सिरे से पूरी प्रक्रिया का होती है। अपराध पीड़ितों के लिए ही लाइसेंस जारी करने का प्रावधान है।
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