आरकोन एक्सपो में साल के सर्वश्रेष्ठ आर्किटेक्ट प्रो. चरनजीत शाह ने कहा कि आर्किटेक्ट्स अपनी संस्कृति, प्रकृति और समाज की जरूरत देखकर ही डिजाइन बनाएं। क्षेत्रीय विरासत और इमोशन (भावना) का इस्तेमाल करें, ताकि नई बनने वाली इमारतों से लोग आत्मीयता से जुड़ सकें।
होटल क्लार्क्स शिराज में आयोजित आर्किटेक्ट्स एसोसिएशन आगरा के चौथे आरकोन एक्सपो में 150 से ज्यादा आर्किटेक्ट्स, इंटीरियर डिजाइनर्स और छात्र शामिल हुए। प्रो. चरनजीत ने कहा कि आर्टिफिशियल नहीं, बल्कि प्राकृतिक चीजों को अपने डिजाइन में शामिल करें। इससे प्रदूषण और रेडिएशन रोकने में कारगर होंगे। वी कॉलम का उपयोग करके पतले फ्लाईओवर बनाएं। तीन पी यानी पीपुल, प्लेस और परपज का ख्याल रखिए। भारत बदल रहा है। काशी और अयोध्या को देखिए। उनके रूपांतरण में आर्किटेक्ट्स का योगदान है। अमेरिका या यूरोपीय देशों से क्यों सीखा जाए, जब देश की अपनी समृद्धशाली सभ्यता और संस्कृति है।
एक्सपो में लगाई उत्पादों की प्रदर्शनी
एक्सपो और प्रदर्शनी का उद्घाटन मंडलायुक्त अमित गुप्ता की पत्नी डॉ. प्रीति गुप्ता ने मुख्य वन अधिकारी आरुषि मिश्रा, आर्किटेक्ट्स एसोसिएशन आगरा के अध्यक्ष समीर गुप्ता, सचिव अमित जुनेजा और सुमित विभव के साथ दीप जलाकर किया। इस दौरान आर्किटेक्ट अवंतिका शर्मा, हिमांशी, सुनील चतुर्वेदी, सिद्धार्थ शर्मा, अनुराग खंडेलवाल, कोषाध्यक्ष अमित बघेल, श्रद्धा अरोरा की उपस्थिति रही।
मेट्रो के बेतरतीब काम पर जताई चिंता
एक्सपो में आए आर्किटेक्ट्स ने फतेहाबाद रोड पर मेट्रो के निर्माण कार्य पर चिंता जताई और कहा कि अन्य शहरों में मेट्रो के कार्य को अच्छे ढंग से किया गया है, यहां बेतरतीब निर्माण कार्य किया गया है। लोगों की परेशानियों का ख्याल नहीं रखा गया।
अवसरों की कमी नहीं- समीर
आर्किटेक्ट्स एसोसिएशन आगरा के अध्यक्ष समीर गुप्ता विभव ने कहा कि आर्किटेक्ट एक्ट 1972 में बना था। इस वर्ष एक्ट के 50 साल पूरे होने पर हमें ये जानना होगा कि अवसरों की कमी नहीं है। आने वाले सालों में करोड़ों भवन बनने हैं, जिसमें अपने ज्ञान का उपयोग बेहतर रहन सहन केलिए किया जा सकता है।