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अवसर मिले तो महिलाएं किसी से कम नहीं

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07एमएनपी-30-अपराजिता के तहत देवी रोड स्थित मदर निर्मला फाउंडेशन प्रशिक्षण केंद्र पर अपराजिता के तह? - फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। जरूरत है तो उन्हें अवसर प्रदान करने की। जिले की बेटियों ने अवसर मिलने पर बड़े से बड़े लक्ष्य को हासिल करके दिखाया है। मैनपुरी की बेटी आसमान में दुश्मन से लड़ने के लिए उड़ान भरती है, तो वहीं दूसरी बेटी ने देशहित में सेना को चुना। पेश है बेटियों के संघर्ष पर आधारित हमारी यह रिपोर्ट।
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एमबीबीएस के बाद बनीं असिस्टेंड कमांडेंट
संघर्ष : देश की सुरक्षा की बात आए तो युवकों का नाम पहले आता है। दो दशक पहले की बात हो तो लड़कियों को सेना में भेजने की बात कोई सोचता भी नहीं था, लेकिन भोगांव निवासी डॉ. मनोज दीक्षित और उपमा दीक्षित की पुत्री डॉ. शिवानी दीक्षित ने लोगों की इस भावना को मात देते हुए देश की रक्षा के लिए कदम बढ़ाया। बीएसएफ में ज्वाइन करने के बाद वह देश की रक्षा के लिए काम कर रही हैं। वर्तमान में वे असिस्टेंट कमांडेंट बीएसएफ के रूप में कार्यरत हैं। मातृभूमि की रक्षा के लिए उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई के बाद बीएसएफ को चुना।
संदेश : पुरुषों के साथ काम करने में किसी भी प्रकार से शर्म न महसूस करें। बेटियों के लिए सेना में नौकरी करना सम्मान की बात है। आज बेटियां किसी से कम नहीं हैं। - डॉ. शिवानी दीक्षित।
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फ्लाइंग ऑफिसर बनी मैनपुरी की बेटी
संघर्ष : लड़कियां किसी भी क्षेत्र में लड़कों से कम नहीं हैं। यह जरूरी नहीं है कि बेटा ही माता-पिता का नाम रोशन करेगा। किशनी क्षेत्र के गांव चांदा निवासी रामनरेश यादव की बेटी प्रियंका यादव ने भी अपने माता-पिता का सिर गर्व से ऊंचा किया है। एडवोकेट रामनरेश यादव के कोई बेटा नहीं है, तीन बेटियां हैं। दूसरे नंबर की बेटी प्रियंका यादव का लालन-पालन पिता ने बेटे की तरह किया। बेटी का भी सपना था कि वह पिता के हर अरमान को पूरा करे। बेटी प्रियंका यादव ने पिता का सपना वर्ष 2007 में पूरा किया। जब वह फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर नियुक्ति हुईं।
संदेश : बेटी और बेटे में कोई अंतर नहीं है। बेटी की अनदेखी न करें। बेटियां भी माता-पिता का नाम रोशन कर सकती हैं। - प्रियंका यादव, फ्लाइंग ऑफिसर।
उद्यमी के रूप में बनाई पहचान
संघर्ष : नगर निवासी सुमन चौहान के पति की मृत्यु उनकी युवा अवस्था में ही हो गई। पति की मौत के बाद दो बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। उन्होंने न केवल बच्चों की बेहतर परवरिश की बल्कि जनपद में उद्योग और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। वह समाजसेवा भी कार्य कर रही हैं। वर्तमान में जहां उनका शीतगृह संचालित हो रहा है। वहीं एक सीबीएसई बोर्ड से इंटर कॉलेज, डिग्री कॉलेज भी संचालित हो रहे हैं। सुमन ने जनपद के विकास में पुरुषों को कड़ी टक्कर दी है। उनका नाम जनपद के उद्योग क्षेत्र में श्रेष्ठ लोगों के बीच गिना जाता है।
संदेश : सुख और दुख जीवन में आते-जाते रहते हैं, लेकिन किसी भी परिस्थिति में हिम्मत हारने की जरूरत नहीं है। हिम्मत से काम लिया जाए तो किसी भी शिखर पर पहुंचा जा सकता है। - सुमन चौहान, उद्यमी।
शिखर पर है इनका नाम
संघर्ष : कस्बा घिरोर क्षेत्र के गांव नगला महुआहार निवासी पूनम यादव पर जिले को नाज है। पूनम यादव अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट टीम में प्रतिभाग कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं। उनके बेहतर प्रदर्शन को देखकर जिले की महिला क्रिकेटरों ने भी उड़ान भरी है। वर्ष 2017 तक जिले में महिला क्रिकेट टीम नहीं थी। इसी वर्ष पूनम मैनपुरी में आईं। नौ अगस्त 2017 को उन्होंने जिले में रोड शो के दौरान महिला क्रिकेटरों को एक नई दिशा दी। पूनम ने वर्तमान में महिला टी-20 विश्वकप में बेहतर गेंदबाजी कर विश्व में तहलका मचाया है।
संदेश : महिलाएं जब कोई कार्य करती हैं तो उन्हें परेशानी होती है, लेकिन उन्हें अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ रहने की जरूरत है। एक दिन छींटाकशी करने वाले ही उनका सम्मान करेंगे। - पूनम यादव, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी।
वायुसेना को बनाया लक्ष्य
संघर्ष : इरादे यदि बुलंद हो तो मंजिल पाना कोई कठिन बात नहीं होती है। यह साबित करके दिखाया है नगर के सदर बाजार निवासी व्यापारी रमेश गेरा की बेटी आशिमा गेरा ने। आशिमा का सपना देश सेवा करना था। इसके लिए उन्होंने वायुसेना को अपना लक्ष्य चुना। आशिमा की पढ़ाई के दौरान आर्थिक संकट भी पैदा हुआ। लेकिन पिता रमेश गेरा और मां कमलेश गेरा ने बेटी का भरपूर सहयोग किया। आशिमा ने भी नगर के एक स्कूल में एक वर्ष शिक्षिका के रूप में कार्य किया। आशिमा की मेहनत रंग लाई और वर्ष 2011 में वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में नियुक्त हुईं। आज आशिमा मैनपुरी के सपनों को आसमान में रोशन कर रही हैं।
संदेश : महिलाएं भी यदि अपने इरादे बुलंद रखें तो उन्हें किसी का मुंह ताकने की जरूरत नहीं है। वे जमीन पर ही नहीं आसमान में भी छलांग लगा सकती हैं। - आशिमा गेरा, स्क्वाड्रन लीडर।
राष्ट्रीय स्तर पर बनाई पहचान
संघर्ष : नगर के मोहल्ला राजा का बाग निवासी पलक तिवारी ने जब बैडमिंटन के क्षेत्र में कदम रखा तो कई दिक्कतें सामने आईं। खेलने के लिए मैदान और प्रशिक्षक की कमी चलते पिता डॉ. विकास तिवारी साथ लेकर पंडित जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम पहुंचे। बेटी के खेल में रुकावट न आए, जिसके लिए पिता ने हमेशा साथ दिया। मौका मिला तो बेटी ने भी जनपद, मंडल, स्टेट के बाद फिर नेशनल तक प्रतिभाग किया।
संदेश : पलक का कहना है कि यदि किसी भी लड़की के अंदर प्रतिभा है तो मुश्किलें उसका रास्ता नहीं रोक सकतीं। सफलता मिलने में देर भले हो सकती है, लेकिन सफलता जरूर मिलेगी। - पलक तिवारी, नेशनल बैडमिंटन खिलाड़ी।
हौसले से पाया मुकाम
संघर्ष : करहल क्षेत्र के गांव प्रहलापुर निवासी बिन्देश्वरी यादव ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय भोगांव से प्राप्त की। खेल में आगे आने के लिए कोई सहयोगी नहीं मिला। लेकिन बिंदेश्वरी ने हिम्मत नहीं हारी। एथलेटिक्स में मंडल और प्रदेश स्तर पर स्थान बनाने के बाद उनका चयन इंटरनेशनल के लिए हुआ। पिता बेताल सिंह आर्मी में तथा मां सीमा देवी गृहिणी थीं। इसलिए कोई सहयोग करने वाला नहीं मिला। वर्ष 2006 में साउथ अफ्रीका में आयोजित होने वाले खेलों के लिए चयन हुआ, लेकिन वह नहीं जा सकीं। इसका मलाल उन्हें आज भी है।
संदेश : जिस क्षेत्र में रूचि है उसी क्षेत्र में पूरी लगन के साथ कार्य करें। किसी के सहयोग की आस छोड़ अपने बूते आगे बढ़ें। - बिंदेश्वरी यादव, इंटरनेशनल खिलाड़ी।
दूसरों के लिए प्रेरणा बनीं मनीषा
संघर्ष : देवपुरा निवासी मनीषा चौहान ने जब खेलों में कदम रखा तो उस समय जिले में महिला खिलाड़ी गिनी-चुनी ही थीं। लोगों ने तरह-तरह की बातें की, लेकिन उन्होंने लोगों की प्रतिक्रियाओं पर ध्यान नहीं दिया और विभिन्न खेलों में प्रतिभाग कर लोगों को सोच बदलने पर मजबूर कर दिया। मनीषा चौहान के पिता कृष्ण गोपाल सिंह चौहान परिषदीय शिक्षक होने के कारण उनका हर संभव सहयोग करते रहे। बेटी की रूचि खेल के प्रति होने के कारण घर पर भी संसाधन जुटाए। मनीषा ने खेलों में एक के बाद एक सफलता हासिल की। मनीषा जिले की महिला खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरणा बनीं।
संदेश : हमारा जिला आज भी पिछड़ा है। इसमें जब भी कोई लड़की अलग हटकर कोई कार्य करती है तो लोग उस पर छींटाकशी करते हैं। लेकिन इन सबसे डरने की जरूरत नहीं है। - मनीषा चौहान, खेल प्रशिक्षक।
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