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अपराजिता: बालिकाएं पढ़ेंगी तो समाज होगा शिक्षित, कन्या शिक्षा का लिया संकल्प

Thu, 31 Oct 2019 07:52 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
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श्रीमती शारदा देवी जौहरी नगर पालिका कन्या महाविद्यालय में अपराजिता बालिका साक्षरता जागरूकता कार्यक्रम में मौजूद छात्राएं - फोटो : अमर उजाला
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श्रीमती शारदा देवी जौहरी नगर पालिका कन्या महाविद्यालय में अमर उजाला ने अपराजिता के तहत बालिका साक्षरता जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। बालिकाओं की शिक्षा के प्रति प्रेरित करने के साथ ही उनके सशक्तीकरण पर भी जोर दिया गया। कार्यक्रम में बालिकाएं अपना संकल्प दोहराती नजर आईं।  
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डॉ. अपर्णा सक्सेना ने कहा कि समाज में बालिकाओं की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। उनके शिक्षित होने से ही समाज शिक्षित हो सकता है। महाविद्यालय में शिक्षा गृहण कर रही छात्राएं उच्च शिक्षा प्राप्त करने के साथ ही अपने आसपास रहने वाली बालिकाओं को भी शिक्षित करने का कार्य करें। उन्होंने कहा कि अमर उजाला द्वारा अपराजिता कार्यक्रम का आयोजन कर सराहनीय कार्य किया जा रहा है। 

आज बालिका शिक्षा को राष्ट्रीय आवश्यकता समझकर जोर दिया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि बालिकाओं की स्थिति में सुधार हुआ है। समय तेजी से बदल रहा है। समय के साथ स्त्री जाति ने भी करवट ली है। आज बालिकाएं, बालकों से किसी क्षेत्र में कम नहीं हैं। वे आज इस प्रतियोगी युग में तेजी से आगे बढ़ रही है। - डॅा. विद्युत लता कुलश्रेष्ठ
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अपराजिता कार्यक्रम में शामिल हुईं छात्राएं - फोटो : अमर उजाला
बालिकाएं सामाजिक कुरीतियों, भेदभाव, प्रताड़ना, उत्पीड़न, कुपोषण और शोषण का शिकार होती रहती है, उनके लिए शिक्षा ही एक ऐसा अस्त्र बन सकता है, जो न केवल उनका नैतिक, सामाजिक और शैक्षणिक अधिकार दिलाता है बल्कि उसे जीवन में आने वाली कठिनाइयों के सामने एक सशक्त महिला के रूप में खड़ा करता है।- गोपिका सोमानी छात्र

बालिकाओं की समाज में अपना स्थान बनाने के लिए शिक्षा को अपना हथियार बनाना होगा। शहरी क्षेत्रों में तो काफी सुधार हुआ है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बालिकाओं की शिक्षा की स्थिति काफी दयनीय है। साधनों की कमी उनकी शिक्षा में आड़े आती हैं। जिससे तमाम छात्राएं उच्च शिक्षा से वंचित रह जाती हैं। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। -पूनम छात्रा

बालिकाओं को अपनी शिक्षा के प्रति स्वयं जागरूक होना होगा। हमारे अभिभावक हमको विद्यालय शिक्षा अध्ययन के लिए भेजते हैं। यह हमारा नैतिक कर्तव्य बनता है कि हम उनकी कसौटी पर खरा उतरें। कड़ी मेहनत कर अपनी मिशाल पेश करें। जिससे सभी अभिभावक उनसे प्रेरणा लेकर अपनी बालिकाओं को शिक्षा के लिए भेज सकें। -रीना छात्रा 

 
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