किसी के पिता दुर्घटना के बाद बिस्तर पर आ गए तो वह उनकी बैसाखी बनीं। किसी के पति का व्यापार चौपट हो गया तो अपना काम शुरू कर सहारा दिया। खुद तो आत्मनिर्भर बनी हीं, अन्य महिलाओं को
भी रोजगार देकर सहारा दिया।
आज बात उन अपराजिताओं की जो परिवार के सामने आई मुश्किल से मुकाबले के लिए खड़ी हुईं। साबित किया कि वो अबला नहीं हैं। कठिनाइयां कई आईं लेकिन संघर्ष से सभी पर जीत पाई। किसी के पिता दुर्घटना के बाद बिस्तर पर आ गए तो वह उनकी बैसाखी बनी। किसी के पति का व्यापार चौपट हो गया तो अपना काम शुरू कर सहारा दिया। खुद तो आत्मनिर्भर बनी हीं, अन्य महिलाओं को भी रोजगार देकर सहारा दिया।
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नौकरी की, ट्यूशन पढ़ाया, फिर खोला ब्यूटी पार्लर
दो साल पहले ट्रक चालक पिता दुर्घटना में घायल हो गए। काफी इलाज के बाद भी वह बिस्तर से उठ नहीं पाए। चार भाई बहनों में मैं सबसे बड़ी थी। इस कारण जिम्मेदारी मुझ पर आ गई। इस चुनौती में धैर्य से काम लिया।
पहले नौकरी की और इसके बाद बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। पिता की बैसाखी बनी और परिवार को संभाला। फिर अपना ब्यूटी पार्लर खोल लिया। जब संभल गई तो और महिलाओं को आगे लाने का काम किया। अब तक 50 से ज्यादा को ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण दे चुकी हूं। - पूजा कौर, बल्केश्वर
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नेहा अग्रवाल, पश्चिमपुरी
- फोटो : अमर उजाला
पति का व्यापार चौपट हुआ, मैंने संभाला परिवार
15 साल पूर्व मेरे पति का कपड़े का व्यापार चौपट हो गया था। इस कारण वह मानसिक तनाव में आ गए। उस समय बच्चे छोटे थे। घर किराए का था। ऐसे में परिवार चलाना आसान नहीं था। मैंने हिम्मत नहीं हारी और ब्यूटी पार्लर खोला। इसमें दस-दस रुपये के काम के लिए आसपास के घरों में जाती थी लेकिन मेरा संकल्प था कि धीरे धीरे अपने पैरों पर खड़ा होना है। काम चल निकला, परिवार संभल गया तो पति का व्यापार भी फिर से खड़ा हो गया। - रूपा नथानी, कमला नगर
हार नहीं मानी, अपने दम पर हुई खड़ी
मैं बचपन से आत्मनिर्भर बनने की सोचती थी। लेकिन उस तरह की शिक्षा नहीं हुई कि मैं अपने पैरों पर खड़ी हो पाऊं। इधर, शादी के बाद ससुरालीजनों ने भी साथ नहीं दिया। मैं अपना काम शुरू करने के लिए कहती तो जवाब मिलता, क्या करोगी काम करके, बच्चे संभालो। मगर, टूटी नहीं।
किराए की दुकान में बुटीक खोल लिया। इसे बंद करने का दबाव पड़ा लेकिन मैंने किया नहीं। धीरे-धीरे काम चलने लगा। आज 6 वर्ष बाद एक बड़ी जगह पर काम शिफ्ट कर लिया है। साथ ही छह लोगों को रोजगार देने लायक भी बन गई हूं। - शैफाली सिंघल, कर्मयोगी
सीए नहीं बन पाई... ऑनलाइन व्यापार शुरू किया
मेरी शादी 18 वर्ष की उम्र में हो गई थी। इस कारण सीए की पढ़ाई बीच में छूट गई। मन में बहुत से अरमान दबे रह गए। शादी के बाद परिवार की जिम्मेदारी आ गई। मगर, अपने पैरों पर खड़े होने का जुनून कम नहीं हुआ था। ससुरालीजनों को बताया तो उन्होंने कहा कि घर की जिम्मेदारी पहले है, काम बाद में। 10 साल पूर्व ऑनलाइन टेरो कार्ड का काम शुरू किया। यह काम चल निकला। खुशी इस बात की है कि 70 लोगों को ये हुनर भी सिखा पाई हूं। - नेहा अग्रवाल, पश्चिमपुरी।
पिता को सहारा देने के लिए शुरू किया काम
घर में आठ लोग थे। इनकी जिम्मेदारी पिता पर थी। ऐसे में पैसों की किल्लत बनी रहती थी। यह देख पिता का सहारा बनने की ठानी और इंटीरियर डिजाइनर के पेशे में आई। लेकिन पता नहीं था कि करना क्या है। यह बात 16 साल पहले की है।
तब इंटीरियर डिजाइनिंग को करियर के तौर पर नहीं लिया जाता था। यह दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों तक सीमित था। लेकिन मुझे भरोसा था कि एक दिन यह काम चलेगा। मैं सही थी। मैंने 12 साल तक साझेदारी में काम किया। इसमें अपनी अलग पहचान बनाई। इसके बाद खुद का काम शुरू किया। - लीना सरभोय, वंशी विहार