फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अपराजिता: 'बेटी है कुदरत का उपहार, जीने और पढ़ने का दो अधिकार'

Fri, 08 Mar 2019 06:16 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
विज्ञापन
नारी गरिमा की शपथ लेतीं छात्राएं
विज्ञापन
मैनपुरी में विश्व महिला दिवस पर शुक्रवार को अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शहर के कुंवर आरसी कन्या इंटर कॉलेज की छात्राओं ने कार्यक्रम में शामिल होकर महिलाओं को उनके अधिकार बताए। साथ ही बेटा और बेटी में फर्क न करने की अपील की। 
विज्ञापन


अपराजिता अभियान के तहत शुक्रवार को शहर से सटे गांव औंडेंय पड़रिया में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई की छात्राओं के सहयोग से कार्यक्रम का आयोजन हुआ। छात्राओं ने गांव की महिलाओं को उनके अधिकार बताए। प्रधानाचार्य उर्मिला भदौरिया ने कहा कि बेटी कुदरत का अनमोल उपहार है। इसे जीने और पढ़ने का अधिकार बेटों की तरह ही है। 

उन्होंने कहा कि आज बेटियां बेटों से कम नहीं हैं। पूर्व माध्यमिक विद्यालय की शिक्षिका वंदना सिंह ने कहा बेटियों के प्रति लोगों को अपनी सोच बदलनी चाहिए। बेटियां आज हर क्षेत्र में अपने मां-बाप का नाम रोशन कर रही हैं। उपस्थित छात्राओं ने अपराजिता अभियान के तहत शपथ भी ली। 
विज्ञापन
विज्ञापन

इस अवसर पर श्वेता पाल, सरिता यादव, तृप्ती भदौरिया, नीतू देवी, अंजना वैस आदि ने गांव की महिलाओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि संविधान में महिलाओं को पुरुषों की तरह समान अधिकार दिए गए हैं। महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों। 

छात्रा गोशिया बानो ने कहा कि महिलाएं आज पुरुषों से किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। जरूरत है तो सिर्फ सोच बदलने की। छात्रा ज्योति पाठक ने कहा कि बेटियों को भी बेटों की तरह पढ़ने लिखने का अधिकार है। बेटी पढ़ेगी नहीं तो आगे कैसे बढ़ेगी। 

छात्रा शिवांगी ने बताया कि संविधान ने महिलाओं को समान अधिकार दिए हैं। महिलाएं जागरूक हों और अपने अधिकारों का इस्तेमाल करें। दीक्षा रघुवंशी ने कहा कि शिक्षा हर व्यक्ति के लिए जरूरी है। मां-बाप को चाहिए कि वह बेटियों की शिक्षा पर भी ध्यान दें। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें