चार हजार साल पुराने मृदभांड की जांच के लिए आगरा से पहुंची एएसआई टीम
तीन फुट खोदाई के बाद पता चला पूरे 4 एकड़ क्षेत्र में बिखरे पड़े हैं मृदभांड
ईंट भट्टे के लिए मिट्टी निकालने को खोदाई की, लेकिन जमीन के नीचे मिल गया इतिहास का खजाना। सहारनपुर के गांव सकतपुर में हड़प्पा सभ्यता की तांबे की कुल्हाड़ी और मृदभांड मिले हैं। आगरा सर्किल के एएसआई अधिकारियों की टीम चार एकड़ में फैले इस क्षेत्र से 4 हजार साल पहले के पुरावशेषों को एकत्र कर आगरा ले आई है, जहां इनकी सफाई करके जांच की जा रही है।
हड़प्पा संस्कृति के पुरावशेष यूं तो सहारनपुर के गांव हुलास, बाड़गांव, नसीरपुर और अंबाखेड़ी में मिल चुके हैं, लेकिन यह पहला मौका है, जब यमुना किनारे की जगह सहारनपुर के दक्षिणी हिस्से में मौजूद तहसील रामपुर मनिहारन के गांव सकतपुर में तांबे की कुल्हाड़ी के साथ चार हजार साल पुराने मृदभांड मिले हों। सकतपुर में हड़प्पा कालीन पुरावशेष मिलना एएसआई अधिकारियों को भी चौंका रहा है। दरअसल, हड़प्पा कालीन सभ्यता में पहले मेरठ के आलमगीर स्थान को छोर माना गया था, लेकिन सहारनपुर में हुलास और बाड़गांव में मृदभांड मिलने के बाद दक्षिणी छोर पर मौजूद गांव में ताम्रयुग की कुठार मिलना एएसआई को आगे की खोज के लिए रास्ता दिखा रही है। सहारनपुर प्रशासन के पत्र के बाद आगरा सर्किल के अधिकारी सहायक पुरातत्वविद डा. आरके सिंह और अर्खित प्रधान की टीम सकतपुर जाकर मृदभांड और ताम्र कुठार आगरा ले आई है। सर्किल आफिस में पुरावशेषों की सफाई कर जांच की जा रही है। माना जा रहा है कि हड़प्पा संस्कृति के कई और महत्वपूर्ण प्रमाण इस साइट पर उत्खनन से मिल सकते हैं।
‘यहां बड़े हिस्से में उत्तर हड़प्पाकालीन मृदभांड और तांबे की कुठार मिली है। हमारी टीम उन अवशेषों की जांच कर रही है। क्षेत्र का उत्खनन करना है या नहीं, इस पर आगे निर्देशों के बाद ही कार्रवाई की जाएगी’
डा. भुवन विक्रम
अधीक्षण पुरातत्वविद