मथुरा के जगवीर के लिए जीतू देवदूत बन गया। जगवीर को उसका मौसा ही अगवा करके अपने साथ लाया और अछनेरा में रेलवे लाइन के किनारे उसकी गला दबाकर हत्या का प्रयास किया। जगवीर के शोर मचाने पर राहगीर जीतू ने उसकी जान बचा ली। अपहर्ता मौसा भाग निकला। अछनेरा पुलिस ने बच्चे को उसके परिवारीजनों के सुपुर्द कर दिया।
मथुरा के भरतपुर गेट निवासी पीतम सिंह के पुत्र जगवीर (12) को उसका मौसा आजमपुर, मथुरा निवासी रवि 30 अप्रैल को बहाने से अपने साथ ले आया था। जगवीर के घरवाले उसकी तलाश में जुटे थे। उन्होंने भरतपुर गेट थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। शनिवार की दोपहर करीब तीन बजे रवि भांजे जगवीर को लेकर अछनेरा में रेलवे लाइन के किनारे पहुंचा। यहां एक गड्ढे के पास ले जाकर तौलिया से उसके गले में फंदा डालकर गला दबाने की कोशिश की। इस पर जगवीर ने शोर मचाया तो मौसा ने उसे गड्ढे में धक्का दे दिया। इसी बीच अरदाया का जीतू वहां से गुजर रहा था। उसने जगवीर के गले से तौलिया निकाली। इस बीच रवि ने जीतू पर हमला किया तो वह उससे भिड़ गया। खुद को घिरता देखकर रवि भाग खड़ा हुआ। इसके बाद जीतू बालक को लेकर बस्ती में आया। उसने पुलिस को जानकारी दी। अछनेरा थाने की पुलिस बालक को अपने साथ ले आई। बाद में भरतपुर गेट थाने की पुलिस बालक को अपने साथ मथुरा ले गई।
दो छात्रों के अपहरण की
सनसनी शाम को खत्म
खंदौली। घर से मोबाइल रिचार्ज कराने की कहकर निकले दो भाई लापता हो गए। शनिवार को घरवालों ने अपहरण की आशंका जताते हुए तहरीर दी लेकिन शाम को दोनों यमुनापार इलाके में मिल गए। रामनगर निवासी फौजी सत्यवीर सिंह के पुत्र सूरज (14) और गजेंद्र (16) शुक्रवार की शाम को अपनी मां से मोबाइल रिचार्ज कराने की कहकर एक सौ रुपये लेकर घर से निकले थे। रात तक घर नहीं लौटे तो हड़कंप मच गया। घरवालों ने काफी तलाश किया मगर पता नहीं चला। शनिवार की सुबह खंदौली थाने में गुमशुदगी की सूचना दी। इस पर पुलिस ने भी दोनों की तलाश शुरू कर दी। देर शाम दोनों भाई यमुनापार इलाके में अपने रिश्तेदार के घर मिल गए।