मैनपुरी। एंबुलेंस इमरजेंसी मेडिकल सेवा है। सरकारी एंबुलेंस पर 21 लाख लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी है। बावजूद इसके सरकारी एंबुलेंस सेवा बदहाल है, इन्हें उपचार (मरम्मत) की दरकार है। स्थिति यह है कि कई एंबुलेंस कमजोर टायर पर दौड़ रही हैं। कई एंबुलेंस में अतिरिक्त पहिया नहीं है।
कहीं एंबुलेंस में स्ट्रेचर टूटे हुए हैं तो वहीं कहीं बंपर रस्सी के सहारे बंधे हुए हैं। कुल मिलाकर जिले में संचालित 55 एंबुलेंस में से एक भी एंबुलेंस पूरी तरह से फिट नहीं है। अमर उजाला की पड़ताल में सरकारी एंबुलेंस की बदहाल स्थिति नजर आई।
केस हिस्ट्री-एक
एंबुलेंस संख्या 32 ईजी 4083 की लाइटें और बंपर टूटा हुआ था। यहां मौजूद चालक रामकुमार ने बताया कि जिले में वर्कशॉप नहीं है। फर्रुखाबाद गया था वहां भी सामान नहीं मिला। अब अगले राउंड पर फिरोजाबाद गाड़ी जाएगी, तब कहीं इसकी मरम्मत होगी। फिलहाल चालक ने लाइट और बंपर को दोनों ओर रस्सी से बांध दिया है।
केस हिस्ट्री-दो
एंबुलेंस संख्या यूपी 32 ईजी 0451 सौ शैया अस्पताल में खड़ी हुई थी। इस एंबुलेंस में स्टेपनी नहीं थी। चालक सत्यपाल ने बताया कि 15 दिन में तीन बार गाड़ी पंचर हो चुकी है। 78 हजार किलोमीटर चलने के बाद भी टायर नहीं बदले गए हैं। स्टेपनी (अतिरिक्त पहिया) नहीं है। जब पंक्चर हो जाती है तो दूसरी गाड़ी मंगानी पड़ती है।
केस हिस्ट्री-तीन
एंबुलेंस संख्या यूपी 32 ईजी 1776 में रखा स्ट्रेचर खराब था। यहां मौजूद चालक सुधीर कुमार ने बताया कि स्ट्रेचर के संबंध में कई बार लिखकर दे चुका हूं। मरीजों को चढ़ाने और उतारने में दिक्कत हो रही है। कभी-कभी तीमारदार भी भला बुरा कहते हैं।
70 हजार किलोमीटर पर बदल जाने चाहिए टायर
विभागीय आदेश के अनुसार 50 हजार से 70 हजार किलोमीटर के बीच टायर बदल जाने चाहिए, लेकिन जिले की 20 एंबुलेंस ऐसी हैं जो 70 हजार से अधिक किलोमीटर तक चल चुकी हैं और उनके टायर नहीं बदले गए हैं। इससे आए दिन ये एंबुलेंस पंक्चर होती रहती हैं।
जिले में नहीं है वर्कशॉप
जिले में एंबुलेंस की मरम्मत के लिए वर्कशॉप नहीं है। इसके चलते जिले की एंबुलेंस मरम्मत के लिए फिरोजाबाद और फर्रुखाबाद भेजी जाती हैं। जिले में वर्कशॉप की व्यवस्था हो तो एंबुलेंस की मरम्मत समय से हो सके।
बोले अधिकारी
सभी चालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने गाड़ी की मरम्मत का ध्यान रखें। यदि किसी के टायर खराब हैं या फिर स्टेपनी नहीं है तो सूचना दें। तीन दिन के अंदर व्यवस्था करा दी जाएगी। चार एंबुलेंस रिजर्व में हैं। यदि कोई एंबुलेंस खराब होती है तो रिजर्व में उपलब्ध चार एंबुलेंस में से भेजी जाती है। - संदीप दीक्षित, जिला प्रभारी एंबुलेंस सेवा