अमर उजाला संवाद में चर्चा करते शहर के व्यापारी
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नोटबंदी और जीएसटी से आहत रीयल एस्टेट के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का 25 हजार करोड़ रुपये का पैकेज राहत और उम्मीद लेकर आया है। बिल्डरों की संस्था क्रेडाई और सिटी रेडिको के सदस्यों का कहना है कि यह पैकेज मुश्किलों से उबार सकता है, इससे हौसला मिला है, अधूरे प्रोजेक्ट पूरे होंगे लेकिन इसकी शर्तें व्यावहारिक और आसान होनी चाहिए, जिससे अपने घर का आम आदमी का सपना पूरा हो सके। आगरा में आठ ऐसे अधूरे प्रोजेक्ट हैं, जिन्हें वित्त मंत्री के पैकेज से उम्मीदें बंधी हैं।
पांच साल के बेचैनी के आलम में यह पैकेज मानसिक राहत लाया है कि सरकार हमारे पीछे खड़ी है। हालांकि प्रोजेक्ट पूरे करने और फौरी राहत मिलने की उम्मीद कम है, लेकिन सकारात्मक रुख नजर आया है। इसका असर ग्राहकों और बाजार पर भी पड़ेगा।
-उमेश शर्मा, अध्यक्ष, क्रेडाई, आगरा
रीयल एस्टेट के लिए पहली बार सरकार ने कोई कदम उठाया। इसका पॉजिटिव संकेत गया है। अगर अधूरे प्रोजेक्ट पूरे हों और ग्राहकों को कब्जा मिल जाए तो बिल्डरों की साख भी सुधरेगी और रीयल एस्टेट में फिर से जान पड़ जाएगी।
-भगत सिंह बघेल, पूर्व अध्यक्ष, क्रेडाई, आगरा
जो प्रोजेक्ट एनपीए और एनसीएलटी में फंसे हुए हैं, उन्हें मदद की जरूरत है। क्रेडाई ने वित्त मंत्री से यह मांग रखी है। वित्तमंत्री के पैकैज की बातें धरातल पर कब उतरेंगी, उसी पर इसकी सफलता निर्भर करेगी। एमआईजी फ्लैट वालों को फायदा मिल सकता है। -शोभिक गोयल, उपाध्यक्ष, क्रेडाई, यूपी
बाजार का ग्रोथ इंजन है रीयल एस्टेट, लेकिन पैकेज में कम रकम के साथ ऐसी शर्तें जोड़ी हैं, जिनका अटके प्रोजेक्ट को फायदा मिलेगा ही नहीं। हर घर या फ्लैट पर 5 लाख की वित्तीय मदद ही हो पाएगी, जबकि औसतन कीमत 40-50 लाख है। -केसी जैन, अध्यक्ष, आगरा सिटी रेडिको
जो पैकेज दिया है, वह ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर है। जो कहा है वह व्यावहारिक ही नहीं है। इस पैकेज का फायदा केवल दिल्ली एनसीआर और बड़े शहरों के प्रोजेक्ट ही उठा पाएंगे। सरकार को कितनी ब्याज देनी होगी, यह भी पता नहीं है। -सुमित विभव, पूर्व अध्यक्ष, क्रेडाई
जो अधूरे प्रोजेक्ट हैं, उनमें निवेशक हैं, असली खरीदार नहीं हैं। ऐसे में वित्त मंत्री के पैकेज का कोई फायदा नहीं दिखता। ग्राहकों के मन में यह विश्वास हो चुका है कि रीयल इस्टेट की कीमतें अभी और गिरेंगी। टैक्स कम करें, होम लोन पर ब्याज दरें कम हों। -राहुल जैन, आगरा सिटी रेडिको
आम लोगों की गाढ़ी कमाई अधूरे प्रोजेक्ट में फंसी हुई है। इस पैकेज का फायदा उठाने में व्यावहारिक दिक्कतें हैं, लेकिन रीयल एस्टेट को पहली बार महसूस हुआ है कि सरकार उनके साथ खड़ी है। इसके सकारात्मक परिणाम दिखेंगे। -सीएल बंसल, उपाध्यक्ष, क्रेडाई